जय-जय रघुराई, रहव सहाई, तैं सुखदाई जगत कहै, मन भगत लहै । गुण तोरे गावय, तेन अघावय, सब सुख पावय दुख न सहै, जब चरण गहै ।। सब मरम लखावत, धरम बतावत, चरित देखावत पाठ गढे़, ये जगत कढ़े । जग रिश्तादारी, करत सुरारी, जगत सम्हारी जगत पढ़े, सब आघु बढ़े ।। -रमेशकुमार सिंह चौहान
लघुकथा : मेडल -डॉ. विनोद कुमार वर्मा
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एक छह फीट ऊँचे गबरू जवान की नियुक्ति सब-इंसपेक्टर के पद पर
यातायात पुलिस में तीन बरस पहले हुई थी। उसकी सेना में भर्ती की तमाम कोशिशें
नाकाम हुई…
1 हफ़्ते पहले