नवा साल के करव सब, परघौनी दिल खोल । नाचव कूदव बने तुम, बजा नगाड़ा ढोल ।। बजा नगाड़ा ढोल, खुशी के अइसन बेरा । पाछू झन तै देख, हवय आगू मा डेरा ।। ‘रमेश‘ गा ले गीत, खुशी के गढ़ ताल नवा । होही बड़ फुरमान, सबो ला ये साल नवा ।।
लघु कथा: क्या भूत होते हैं?-रमेश चौहान
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रामाधार के पोते चिंटू ने पहली बार ये सवाल रात के दस बजे पूछा। लाइट चली गई
थी। सुमित्रा रसोई में ढिबरी जला रही थी। बाहर बँसवारी में हवा चल…
1 हफ़्ते पहले