मंगलवार, 19 सितंबर 2017

मुकतक (पीये बर पानी मिलत नई हे)

ऊपर वाले हा ढिलत नई हे
हमरे भाखा ओ लिलत नई हे
सेप्टिक बर आवय कहां ले
पीये बर पानी मिलत नई हे
-रमेश चौहान

मुक्तक (दूसर ला राखे बर चूरत हस)

अपने भाई ला बेघर करके
बैरी माने तैं बंदूक धरके
दूसर ला राखे बर चूरत हस
अपने भेजा मा भूसा भरके
-रमेश चौहान

बुधवार, 30 अगस्त 2017

हे गणनायक

हे गणनायक देव गजानन
(मत्तगयंद सवैया)

हे गणनायक देव गजानन
राखव राखव लाज ल मोरे ।
ये जग मा सबले पहिली प्रभु
भक्तन लेवन नाम ल तोरे ।
तोर ददा शिव शंकर आवय
आवय तोर उमा महतारी ।।
कोन इहां तुहरे गुण गावय
हे महिमा जग मा बड़ भारी ।

राखय शर्त जभे शिवशंकर
अव्वल घूमय सृष्टि ल जेने ।
देवन मा सबले पहिली अब
देवन नायक होहय तेने ।।
अव्वल फेर करे ठहरे प्रभु
सृष्टिच मान ददा महतारी ।
कोन इहां तुहरे गुण गावय
हे महिमा जग मा बड़ भारी ।।

काम बुता शुरूवात करे बर
होवय तोर गजानन पूजा ।
मेटस भक्तन के सब विध्न ल
विघ्नविनाशक हे नहि दूजा ।।
बुद्धि बने हमला प्रभु देवव
हो मनखे हन मूरख भारी ।
कोन इहां तुहरे गुण गावय
हे महिमा जग मा बड़ भारी ।

गुरुवार, 24 अगस्त 2017

तीजा

 मत्तगयंद सवैया

हे चहके बहिनी चिरई कस
हॉसत गावत मानत तीजा ।
सोंध लगे मइके भुइया बड़
झोर भरे दरमी कस बीजा ।।
ये करु भात ह मीठ जनावय
डार मया परुसे जब दाई ।
लाय मयारु ददा लुगरा जब
छांटत देखत हाँसय भाई ।।

तीजा-पोरा

आवत रहिथन मइके कतको, मिलय न एक सहेली ।
तीजा-पोरा के मौका मा, आथे सब बरपेली ।।

ओही अँगना ओही चौरा, खोर-गली हे ओही ।
आय हवय सब सखी सहेली, लइकापन ला बोही ।

हमर नानपन के सुरता ला, धरे हवन हम ओली ।
तीजा-पोरा मा जुरिया के, करबो हँसी ठिठोली ।।

तरिया नरवा घाट घठौंदा, जुरमिल के हम जाबो ।
जिनगी के चिंता ला छोड़े, लइका कस सुख पाबो ।।

अपन-अपन सुख दुख ला हेरत, हरहिंछा बतियाबो ।
तीजा-पोरा संगे रहिके, अपन-अपन घर जाबो ।

बुधवार, 16 अगस्त 2017

पानी पानी अब चिहरत हस, सुनय कहां भगवान

नदिया छेके नरवा छेके, छेके हस गउठान ।
पानी पानी अब चिहरत हस, सुनय कहां भगवान ।।

डहर गली अउ परिया छेके, छेके सड़क कछार ।
कुँवा बावली तरिया पाटे, पाटे नरवा पार ।।
ऊँचा-ऊँचा महल बना के, मारत हवस शान ।
पानी पानी अब चिहरत हस, सुनय कहां भगवान ।।

रूखवा काटे जंगल काटे, काटे हवस पहाड़ ।
अपन सुवारथ सब काम करे, धरती करे कबाड़ ।।
बारी-बखरी धनहा बेचे, खोले हवस दुकान ।
पानी पानी अब चिहरत हस, सुनय कहां भगवान ।।

गिट्टी पथरा अँगना रोपे, रोपे हस टाइल्स ।
धरती के पानी ला रोके, मारत हस स्टाइल्स ।।
बोर खने हस बड़का-बड़का, पाबो कहिके मान ।
पानी पानी अब चिहरत हस, सुनय कहां भगवान ।।

कइसे जी भगवान

जर भुंजा गे खेत मा, बोये हमरे धान ।
तन लेसागे हे हमर, कइसे जी भगवान ।।
तरसत हन हम बूंद बर, धरती गे हे सूख ।
बरस आय ये तीसरा, पीयासे हे रूख ।।
ठोम्हा भर पानी नही, कइसे रखब परान ।
तन लेसागे हे हमर, कइसे जी भगवान ।।
खेत-खार पटपर परे, फूटे हवय दरार ।
नदिया तरिया नल कुँवा, सुख्खा हावे झार ।।
हउला बाल्टी डेचकी, मूंदे आँखी कान ।
तन लेसागे हे हमर, कइसे जी भगवान ।।
बादर होगे दोगला, मनखे जइसे आज ।
चीं-ची चिरई मन कहय, पापी मन के राज ।।
मनखे हावय लालची, बेजाकब्जा तान ।
तन लेसागे हे हमर, कइसे जी भगवान ।।