तोर मोर हे एके जात, दूनों हन मनखे प्राणी । नेक सोच ला अंतस राख, करबो गा हमन सियानी ।। तोर मोर ले बड़का देश, राखब हम एला एके । नो हन कोनो बड़का छोट, बुरा सोच देथन फेके ।। अगड़ी-पिछड़ी कइसन जात, अउ ये दलित आदिवासी । बांट रखे हमरे सरकार, इही काम हे बदमासी ।। वोट बैंक पर राखे छांट, नेता के ये शैतानी । एक रही हम मनखे जात, छोड़-छाड़ अब नादानी ।। -रमेश चौहान
लघु कथा: क्या भूत होते हैं?-रमेश चौहान
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रामाधार के पोते चिंटू ने पहली बार ये सवाल रात के दस बजे पूछा। लाइट चली गई
थी। सुमित्रा रसोई में ढिबरी जला रही थी। बाहर बँसवारी में हवा चल…
1 हफ़्ते पहले