अरे पगली, मै होगेव पगला, तोर मया म । तोर सुरता, निंद भूख हरागे, मया म तोर । रात के चंदा, चांदनी ल देखव, एकटक रे । कब होही रे, मया संग मिलाप , गुनत हव । मया नई हे, गोरी के अंतस म, सुर्रत हव । एक नजर, देख तो मोरो कोती, मया के संगी । ....‘रमेश‘...
गुल्लक (हिंदी लघुकथा) – डॉ. विनोद कुमार वर्मा
-
दस बरस की अंशु की छुट्टियाँ चल रही थी। आज शुक्रवार का दिन था।
महीने का आखिरी तारीख भी। पापा आफिस जाने के लिए निकल ही रहे थे कि…
6 दिन पहले