//अपन बोली मा बोलव// (शुभग दंडक छंद) मन अपन तैं खोल, कुछु फेर बोल, कुछु रहय झन पोल, निक लगय गा गोठ । खुद अपन ला भाख, खुद लाज ला राख, सब डहर ला ताक, सब करय गा पोठ । गढ अपन के बात, जस अपन बर भात, भर पेट सब खात, कर तुहूँ गा रोठ । गढ़ हमर छत्तीस, तब बोल मत बीस, मन डार मत टीस, अब बनव गा मोठ ।। -रमेश चौहान
लघुकथा : मेडल -डॉ. विनोद कुमार वर्मा
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एक छह फीट ऊँचे गबरू जवान की नियुक्ति सब-इंसपेक्टर के पद पर
यातायात पुलिस में तीन बरस पहले हुई थी। उसकी सेना में भर्ती की तमाम कोशिशें
नाकाम हुई…
1 हफ़्ते पहले