छत्तीसगढ़ी मा नवगीत के कोठी-‘‘मोर कलम शंकर बन जाही’’ छत्तीसगढ़ी नवगीत के ये पहिली नवगीत संग्रह आय । ये पुस्तक मा आप ला नवा-नवा बिम्ब प्रतिक मा रचना पढ़े ला मिलही, येला एक बार जरूर पढ़व- ➤ पुस्तक ला पढ़व
पुरु–उर्वशी संवाद:विरह में रचा जीवन-आदर्श उज्जवल उपाध्याय
-
वाक्यों, विचार, भावुकता पर नेत्रों पर और सरलता पर, देवत्व तिरस्कृत कर उस
दिन उर्वशी मुग्ध थी नरता पर, अप्सरा स्वर्ग की, नारी बन पृथ्वी के दुख सुख
सहने ...
5 दिन पहले