पइसे के पाछू कभू, बइहा झन तो होव । चलय हमर परिवार हा, अतका धाने बोव । अतका धाने, बोव सबो झन, भूख मरी मत । पइसा पाछू, होके बइहा, हम अति करि मत ।। दुनिया ले तो, हमला जाना, नगरा जइसे । आखिर बेरा, काम न आवय, तोरे पइसे ।।
पुरु–उर्वशी संवाद:विरह में रचा जीवन-आदर्श उज्जवल उपाध्याय
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वाक्यों, विचार, भावुकता पर नेत्रों पर और सरलता पर, देवत्व तिरस्कृत कर उस
दिन उर्वशी मुग्ध थी नरता पर, अप्सरा स्वर्ग की, नारी बन पृथ्वी के दुख सुख
सहने ...
2 दिन पहले