सबले पहिली माथ नवावय, हाथ जोर के तोर गणेश । अपन वंश के गौरव गाथा, फेर सुनावत हवय ‘रमेश‘ ।। अपन देश अउ अपन धरम बर, जीना मरना जेखर काम । जब तक सूरज चंदा रहिथे, रहिथे अमर ओखरे नाम ।। पराक्रमी योद्धा बलिदानी, भारत के आखरी सम्राट । पृथ्वीराज अमर हावे जग, ऊँचा राखे अपन ललाट ।। जय हिन्दूपति जय दिल्लीपति, जय हो जय हो पृथ्वीराज । अद्भूत योद्धा तैं भारत के, तोरे ऊँपर सबला नाज ।। स्वाभिमान बर जीना मरना, जाने जेने एके काम । क्षत्रीय वर्ण चौहान कहाये, अग्नी वंशी जेखर नाम ।। आगी जइसे जेठ तिपे जब, अउ रहिस अंधियारी पाख । रहिस द्वादशी के तिथि जब, जनमे बालक पृथ्वीराज ।। कर्पूर देवी दाई जेखर, ददा रहिस सोमेश्वर राय । रहिस घात सुग्घर ओ लइका, सबके मन ला लेवय भाय ।। लइकापन मा शेर हराये, धरे बिना एको हथियार । बघवा जइसे तोरे ताकत, जाने तभे सकल संसार ।। रहे बछर ग्यारा के जब तैं, हाथ ददा के सिर ले जाय । अजमेर राज के ओ गद्दी, नान्हेपन ले तैं सिरजाय ।। अंगपाल दिल्ली के राजा, रिश्ता मा तो नाना तोर । ओखर पाछू दिल्ली गद्दी, अपन हाथ धर करे सजोर ।। एक संघरा दू-दू गद्दी, गढ़ दिल्ली अउ गढ़ ...
गीत : आज बंधे दो मन एक डोर में
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*मुखड़ा (युगल)*
आज बंधे दो मन एक डोर में
सपनों की उजली भोर में
तुम हाथ पकड़ कर साथ चलो
मैं छाया बन जाऊँ हर मोड़ में
आज बंधे दो मन एक डोर में
*अंतरा 1 (स...
1 घंटे पहले