बुद्धिजीवी ज्ञान तोरे, आज बैरी कस खड़े । देश द्रोही साथ धर के, आज बैरी कस लड़े।। देश सबले तो बड़े हे, थोरको तैं नइ पढ़े । ज्ञान सब बेकार होथे, देश जेने ना गढ़े ।। बुद्धिजीवी ज्ञान तोरे, आज अपने पास धर । ज्ञान अपने हाथ धर के, सोच अपने सोझ कर ।। उग्रवादी तोर भाई, देशप्रेमी शत्रु हे । लाज घर के बेच खाये, कोन तोरे शत्रु हे ।। -रमेश चौहान
कहिनी:पानी हे अमोल -डोरेलाल कैवर्त
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“‘ बिन पानी नि हे जिनगानी* ” ए कहना सोलाआना सिरतोन आय । पानी के बिना जिनगी
जिए के कल्पना घलो नि करे जा सके ? हमन सबो जानत हांवन…
3 हफ़्ते पहले