खेत-खार म जहर-महुरा (दंडकला छंद) कतका तैं डारे, बिना बिचारे, खेत-खार म जहर-महुरा । अपने मा खोये, तैं हर बोये, धान-पान य चना-तिवरा ।। मरत हवय निशदिन, चिरई-चिरगुन, रोगे-राई मा मनखे । मनखे सब जानय, तभो न मानय, महुरा ला डारय तनके ।। -रमेशकुमार सिंह चौहान
लघुकथा : मेडल -डॉ. विनोद कुमार वर्मा
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एक छह फीट ऊँचे गबरू जवान की नियुक्ति सब-इंसपेक्टर के पद पर
यातायात पुलिस में तीन बरस पहले हुई थी। उसकी सेना में भर्ती की तमाम कोशिशें
नाकाम हुई…
1 हफ़्ते पहले