खेत-खार म जहर-महुरा (दंडकला छंद) कतका तैं डारे, बिना बिचारे, खेत-खार म जहर-महुरा । अपने मा खोये, तैं हर बोये, धान-पान य चना-तिवरा ।। मरत हवय निशदिन, चिरई-चिरगुन, रोगे-राई मा मनखे । मनखे सब जानय, तभो न मानय, महुरा ला डारय तनके ।। -रमेशकुमार सिंह चौहान
कहिनी:पानी हे अमोल -डोरेलाल कैवर्त
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“‘ बिन पानी नि हे जिनगानी* ” ए कहना सोलाआना सिरतोन आय । पानी के बिना जिनगी
जिए के कल्पना घलो नि करे जा सके ? हमन सबो जानत हांवन…
4 हफ़्ते पहले