कहां देवता हे इहां कोन जाने । न जाने दिखे ओ ह कोने प्रकारे ।। इहां देवता हा करे का बुता हे । सबो प्रश्न के तो जवाबे ददा हे ।। ददा मोरे ब्रम्हा देह मोरे बनाये । मुँहे डार कौरा ददा बिष्णु मोरे ।। शिवे होय के दोष ला मोर मांजे । ददा हा धरा के त्रिदेवा कहाये ।। कभू देख पाये न आँसू ल मोरे । मने मोर चाहे जऊने ददा दै ।। खुदे के मने ला ददा हा दबाये । जिये हे मरे हे ददा मोर सेती ।। भरे हाथ कोरा दिने रात मोला । खुदे संग खवाये धरे हाथ कौरा ।। खुदे पीठ चढ़ाये ददा होय घोड़ा । धरे हाथ संगी बने हे ददा हा ।।
एक लघु कथा:जिंदगी, गरीबी, संघर्ष और जिम्मेदारी
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जिंदगी, गरीबी, संघर्ष और जिम्मेदारी — डॉ. अर्जुन दुबे यह एक सच्ची घटना पर
आधारित छोटी-सी कहानी है। यह उस महिला के जीवन का चित्र है जिसे मैं पिछले
आठ–नौ…
3 दिन पहले