सीता माता ला देखे हव का जी, मोर राम के ओ दुलारी ला सीता माता ला देखे हव का जी, मोर राम के ओ दुलारी ला वल्कल पहिरे वियोग गहिरे, दुख के ओ दुखयारी ला जी वल्कल पहिरे वियोग गहिरे दुख के ओ दुखयारी ला जी सीता माता ला देखे हव का जी, मोर राम के ओ दुलारी ला सीता माता ला देखे हव का जी, मोर राम के ओ दुलारी ला रावण के लंका बस्ती मा, कोन संत के हे बासा रावण के लंका बस्ती मा, कोन संत के हे बासा जेखर अंगना तुलसी बिरवा, जेखर अंगना तुलसी बिरवा, राम नाम हे दरवाजा, दुखयारी ला देखे हव का जी मोर राम के ओ दुलारी ला राम राम कहि विभिशण जागे, सम्मुख हनुमत पाये राम राम कहि विभिशण जागे, सम्मुख हनुमत पाये देख देख एक दूसर ला, देख देख एक दूसर ला, अपन गला लगाये, दुखयारी ला देखे हव का जी मोर राम के ओ दुलारी ला विभिशण ला संत जाने, पूछत हवे हनुमान विभिशण ला संत जाने, पूछत हवे हनुमान रावण जेन नारी हर लाय, रावण जेन नारी हर लाय रखे हे कोन स्थान, दुखयारी ला देखे हव का जी मोर राम के ओ दुलारी ला
एक राजर्षि की मूर्त कल्पना है शाहजहांपुर की पब्लिक लाइब्रेरी-प्रो रवीन्द्र
प्रताप सिंह
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तकनीकी क्रांति के इस दौर में जब सब कुछ डिजिटल माध्यमों पर सिमटता जा रहा है,
तब भी किताबों का आकर्षण और महत्व कम नहीं हुआ है। किताबें केवल शब्दों…
3 हफ़्ते पहले