ये हँसी ठिठोली, गुरूतुर बोली, मोरे अंतस खोले । ये कारी आँखी, हावय साखी, मोरे अंतस डोले ।। जस चंदा टुकड़ा, तोरे मुखड़ा, मोरे पूरणमासी । मन कुहकत रहिथे, चहकत रहिथे, तोरे सुन-सुन हाँसी ।।
एक लघु कथा:जिंदगी, गरीबी, संघर्ष और जिम्मेदारी
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जिंदगी, गरीबी, संघर्ष और जिम्मेदारी — डॉ. अर्जुन दुबे यह एक सच्ची घटना पर
आधारित छोटी-सी कहानी है। यह उस महिला के जीवन का चित्र है जिसे मैं पिछले
आठ–नौ…
3 दिन पहले