ये हँसी ठिठोली, गुरूतुर बोली, मोरे अंतस खोले । ये कारी आँखी, हावय साखी, मोरे अंतस डोले ।। जस चंदा टुकड़ा, तोरे मुखड़ा, मोरे पूरणमासी । मन कुहकत रहिथे, चहकत रहिथे, तोरे सुन-सुन हाँसी ।।
लघु कथा: क्या भूत होते हैं?-रमेश चौहान
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रामाधार के पोते चिंटू ने पहली बार ये सवाल रात के दस बजे पूछा। लाइट चली गई
थी। सुमित्रा रसोई में ढिबरी जला रही थी। बाहर बँसवारी में हवा चल…
2 हफ़्ते पहले