हमर धरम तो बस एक हे । देश-भक्ति हा बड़ नेक हे जनम-भूमि जन्नत ले बड़े । जेखर बर बलिदानी खड़े मरना ले जीना हे बड़े । जीये बर जीवन हे पड़े छोड़ गोठ तैं अधिकार के । अपन करम कर तैं झार के अपने हिस्सा के काम ला । अपने हिस्सा के दाम ला करना हे अपने हाथ ले । भरना हे अपने हाथ ले बइमानी भ्रष्टाचार के। झूठ-मूठ के व्यवहार के जात-पात के सब ढाल ला । तोड़व ये अरझे जाल ला देश बड़े हे के प्रांत हो । सोचव संगी थोकिन शांत हो देश गढ़े बर सब हाथ दौ । आघू रेंगे बर सब साथ दौ मनखे-मनखे एके मान के । सबला तैं अपने जान के मया-प्रेम मा तैं बांध ले । ओखर पीरा अपने खांध ले देश मोर हे ये मान ले । जीवन येखर बर ठान ले अपने माने मा तो तोर हे । नही त तोरे मन मा चोर हे
गीत : आज बंधे दो मन एक डोर में
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*मुखड़ा (युगल)*
आज बंधे दो मन एक डोर में
सपनों की उजली भोर में
तुम हाथ पकड़ कर साथ चलो
मैं छाया बन जाऊँ हर मोड़ में
आज बंधे दो मन एक डोर में
*अंतरा 1 (स...
3 घंटे पहले