बुता काम बिना दाम, मिलय नही ये दुनिया । लिखे पढ़े जेन कढ़े, ओही तो हे गुनिया ।। बने पढ़व बने कढ़व, शान-मान यदि चाही । पूछ परख तोर सरख, होही जब कुछु आही ।
पुरु-उर्वशी-आदर्श उज्जवल उपाध्याय
-
वाक्यों, विचार, भावुकता परनेत्रों पर और सरलता पर,देवत्व तिरस्कृत कर उस
दिनउर्वशी मुग्ध थी नरता पर,अप्सरा स्वर्ग की, नारी बनपृथ्वी के दुख सुख सहने
को,स्वीका...
3 दिन पहले