जापानी विधा । हाइकू, तांका, चोका । देश मा छाये ।। कोन हे इहां छंद के पूछईया । कोन बताये । ये मोर देश मोर अपने आय घात सुहाये । देश के माटी पुराना परिपाटी आज नंदाये । नवा लहर मचाये हे कहर जुन्ना ला खाये । कोन देखे हे मौसम बदले मा आने धरती । कोनो पेेड मा नवा पत्ती के आये नवा जर हे । टुकना तोपे कोन डोकरा राखे काला ये भाते ।
कहिनी:पानी हे अमोल -डोरेलाल कैवर्त
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“‘ बिन पानी नि हे जिनगानी* ” ए कहना सोलाआना सिरतोन आय । पानी के बिना जिनगी
जिए के कल्पना घलो नि करे जा सके ? हमन सबो जानत हांवन…
5 हफ़्ते पहले