आगी झन बारँव इहाँ, इहाँ सरग के ठाँव । छत्तीसगढ़ नाम हवय, सरग दुवारी छाँव ।। सरग दुवारी, छाँव निहारत, दुनिया आथे । आथे जेने, इही ठउर मा, बड़ सुख पाथे । हमरे माटी, चुपरय छाती, कहि पालागी । अपन पराया, कहि कहि के झन, बारँव आगी ।।
विभीषण की प्रासंगिकता मेरे दृष्टिकोण में-डॉ. अर्जुन दुबे
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विभीषण की प्रासंगिकता: “घर का भेदी” या सत्य का साहसी स्वर? भारतीय जनमानस
में एक कहावत बहुत प्रचलित है—“घर का भेदी लंका ढाहे।” यह कहावत प्रायः विभीषण
के संद...
1 हफ़्ते पहले