भृंग छंद नगण (111) 6 बार अंत म पताका (21) चल न घर ग, बिफर मत न, चढ़त हवय दारू । कहत कहत, थकत हवय, लगत हवय भारू ।। लहुट-पहुट, जतर-कतर, करत हवस आज । सुनत-सुनत, बकर-बकर, लगत हवय लाज ।।
छत्तीसगढ़ी काव्य संग्रह आपरेशन एक्के घॉंव भाग-2
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छ्त्तीसगढ़िया के धियान रखैया छत्तीसगढ़िया के धियान रखैया, किसान राज चलैया।
मोर छत्तीसगढ़ में स्वतंत्रता के,नवा सुरुज उगैया।। हमर बर तो एकर पहिली,
रिहिस रा...
2 हफ़्ते पहले