बुद्धिजीवी ज्ञान तोरे, आज बैरी कस खड़े । देश द्रोही साथ धर के, आज बैरी कस लड़े।। देश सबले तो बड़े हे, थोरको तैं नइ पढ़े । ज्ञान सब बेकार होथे, देश जेने ना गढ़े ।। बुद्धिजीवी ज्ञान तोरे, आज अपने पास धर । ज्ञान अपने हाथ धर के, सोच अपने सोझ कर ।। उग्रवादी तोर भाई, देशप्रेमी शत्रु हे । लाज घर के बेच खाये, कोन तोरे शत्रु हे ।। -रमेश चौहान
पुरु–उर्वशी संवाद:विरह में रचा जीवन-आदर्श उज्जवल उपाध्याय
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वाक्यों, विचार, भावुकता पर नेत्रों पर और सरलता पर, देवत्व तिरस्कृत कर उस
दिन उर्वशी मुग्ध थी नरता पर, अप्सरा स्वर्ग की, नारी बन पृथ्वी के दुख सुख
सहने ...
1 हफ़्ते पहले