छत्तीस प्रकार सोच धरे छत्तीस प्रकार के मनखे छत्तीसगढ़ के संगे-संग हमर देश मा रहिथे जइसे कोनो फूल के माला मा रिकिम-रिकिम के फूल एक संग गुथाये होवय । हमर देश के छाती हा घातेच चाकर हे जेमा समा जाथे आनी-बानी के भाशा-बोली अउ आनी-बानी के सोच वाले मनखे । फेर अभी-अभी धुँवा आवत हे आगी सुलगत हे भीतर-बाहिर अपन-बिरान तोर-मोर के कचरा मा कोनो लुकी डार दे हे । दउड़व-दउड़व अपन सोच-विचार के हउला-डेचकी धर के समता के पानी भर के भभकत आगी ला जल्दी ले बुतोवव ।
लघु कथा: क्या भूत होते हैं?-रमेश चौहान
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रामाधार के पोते चिंटू ने पहली बार ये सवाल रात के दस बजे पूछा। लाइट चली गई
थी। सुमित्रा रसोई में ढिबरी जला रही थी। बाहर बँसवारी में हवा चल…
1 हफ़्ते पहले