कभू आय कभू तो जाय, सुख बादर जेन कहाये। सदा रहय नहीं गा साथ, दुख जतका घाम जनाये ।। बने हवय इहां दिन रात, संघरा कहां टिक पाये । बड़े होय भले ओ रात, दिन पक्का फेर सुहाये ।।
एक लघु कथा:जिंदगी, गरीबी, संघर्ष और जिम्मेदारी
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जिंदगी, गरीबी, संघर्ष और जिम्मेदारी — डॉ. अर्जुन दुबे यह एक सच्ची घटना पर
आधारित छोटी-सी कहानी है। यह उस महिला के जीवन का चित्र है जिसे मैं पिछले
आठ–नौ…
6 दिन पहले