कोने रंग लगांंव, कोनेे रंग लगांंव कोने रंग लगांंव, आसो के होरी मा । कोने अंग पिऊरा रे, कोने अंग लाल कोने अंग लाल कोने अंग हरियर रे, कोने अंग गुलाल कोने अंग गुलाल कोने रंग लगांव, आसो के होरी मा । पिऊरा रंग ले, तोला पिऊरावंव के मांघ सजावंव लाल माघ सजावंव लाल हाथ हरियर चूरी कस, ओठ गुलाबी गुलाल ओठ गुलाबी गुलाल कोने रंग लगांंव, आसो के होरी मा । रंग-रंग के हाथ मा, धरे हंंव गुलाल धरे हंव गुलाल तोला रंगे बिना रे गोरी, कइसे मोर तिहार कइसे मोर तिहार कोने रंग लगांंव, आसो के होरी मा । -रमेश चौहान
पुरु–उर्वशी संवाद:विरह में रचा जीवन-आदर्श उज्जवल उपाध्याय
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वाक्यों, विचार, भावुकता पर नेत्रों पर और सरलता पर, देवत्व तिरस्कृत कर उस
दिन उर्वशी मुग्ध थी नरता पर, अप्सरा स्वर्ग की, नारी बन पृथ्वी के दुख सुख
सहने ...
2 दिन पहले