छत्‍तीसगढ़ी छंद कविता के कोठी

रमेशकुमार सिंह चौहान के छत्तीसगढ़ी छंद
कविता के कोठी मा आपमन के हृदय ले स्‍वागत हे,
इहां आपमन छत्‍तीसगढ़ी छंद, लोकगीत ददरिया,
करमा भोजलीगीत, मुक्‍तक,गजल, गीत, नवगीत,
हाइकु, तुकांत अउ अतुकातं जइसे कविता पढ़ सकत हव |
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भागही ये कोरोना

 भागही ये कोरोना (कुण्‍डलियॉं) रहना दुरिहा देह ले, रहि के मन के तीर । कोरोना के काल मा, होये बिना अधीर ।। होय बिना अधीर, संग अपने ला दे ना ।...
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गावत हे फाग रे (घनाक्षरी छंद)

 गावत हे फाग रे (घनाक्षरी छंद) आमा मउराये जब, बउराये परसा हा,  भवरा हा मंडरा के, गावत हे फाग रे । झुमर-झुमर झूमे, चुमे गहुदे डारा ल, महर-महर...
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तुकांत गज़ल-भीतरे भीतर जरव मत

 भीतरे भीतर जरव मत (तुकांत गज़ल) भीतरे भीतर जरव मत बिन आगी के बरव मत अपन काम ले काम जरूरी फेर बीमरहा कस घर धरव मत जेला जे पूछय तेला ते पूछव ...
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ददरिया- ये फूल कैयना

 ददरिया- ये फूल कैयना हे गोडे मा चप्पल, अउ चप्पल मा हिल तैं मटकत रेंगत हस जावत हे मोर दिल, ये फूल कैयना हे हाथे मा मोबइल, बाजत हे घंटी हे हा...
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बसदेवा गीत- देखव कतका जनता रोठ

 बसदेवा गीत-देखव कतका जनता रोठ  (चौपई छंद) फोटो Youtube.com से सौजन्‍य सुनव सुनव गा संगी मोर ।  जेला देखव तेने चोर नेता अउ जनता के गोठ । काल...
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चुन्दी : हेयर स्‍टाइल पर कविता

 चुन्दी (कुण्‍डलियां) चुन्दी बगरे हे मुड़ी, जस कोनो फड़बाज। लम्बा-लम्बा ठाढ़ हे, जइसे के लठबाज ।। जइसे के लठबाज, तने हे ठाढ़े-ठाढ़े । कंघी के का ...
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जेखर बल परताप, टिके हे धरती तरिया

 कुण्‍डलियां                                                           तरिया भीतर तउरथे, जिंदा मछरी लाख । चार मरे मछरी लखत, डोलय काबर साख ।।...
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नीति के दोहा

 नीति के दोहा धरम करम के सार हे, जिये मरे के नेंग । जीयत भर करले करम, नेकी रद्दा रेंग ।। करम तोर पहिचान हे, करम तोर अभिमान । जइसे करबे तैं क...
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ताते-तात

भागही ये कोरोना

 भागही ये कोरोना (कुण्‍डलियॉं) रहना दुरिहा देह ले, रहि के मन के तीर । कोरोना के काल मा, होये बिना अधीर ।। होय बिना अधीर, संग अपने ला दे ना ।...

अउ का-का हे इहाँ-

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