हे भारत महतारी परणाम हवय गाड़ा-गाड़ा, हे भारत महतारी । तोरे महिमा कइसे गावव, दुनिया मा ये भारी ।। परणाम हवय गाड़ा-गाड़ा, हे भारत महतारी । तोरे महिमा कइसे गावव, दुनिया मा ये भारी ।। हे भारत महतारी हे भारत महतारी हे भारत महतारी लहर-लहर नदियां लहरावय, सरर-सरर पुरवाही। रुख -राई गमगम ले गमके, फर धर हाही-माही।। खेतखार अउ अरिया-परिया, हरियर-हरियर छाये। जंगल-झाड़ी सागर परवत, सबके मन ला भाये ।। लइका मन के पेट भरे बर, धरे परोसा थारी। परणाम हवय गाड़ा-गाड़ा, हे भारत महतारी । हे भारत महतारी हे भारत महतारी हे भारत महतारी गुरतुर-गुरतुर भाखा बोली, गुरतुर हॅंसी ठिठोली। लुकलुक ले चंदा चंदैनी, सूरत सुग्घर भोली ।। तोरे लइका जयकार करत, सुर म सुर मिलाये। महतारी के रक्षा खातिर, मुड़ मां कफ़न बंधाये ।। हम तो बारा घला बजाबो, नो हय झूठ लबारी । परणाम हवय गाड़ा-गाड़ा, हे भारत महतारी । हे भारत महतारी हे भारत महतारी हे भारत महतारी -रमेश चौहान...
आज स्कूल के टूर मा, घूमेन ठउर पांच । कौशिल्या मां ठउर ले, घूचापाली सांच । राजिम चम्पारण ठउर, खल्लारी तो गेन। संग संगवारी चारझन, खूब मज़ा तो लें । कौशिल्या माता राम के, भाचा हमरे राम । चंदखुरी सुघ्घर गांव से, जे कौशिल्या धाम ।। राजीव लोचन झरझर, महानदी के धार । पैरी सोढुर के मेल ले, हरय पाप ला झार ।। जगन्नाथ के रुप हे, ये लोचन राजीव । दरस परस जब करें हन, होंगे भक्ति संजीव । चंपारण वल्लभ प्रगट, गढ़े भक्ति के धाम । श्याम श्याम मन श्याम भज, जो एकै आधार । खल्लारी माता धाम मा, सीढ़ी बने हजार । जय माता जयकार ले, मन हा भरे हमारे ।। घूचापाली मां हवय, मां चण्डी दरबार । जिहां करें हे आरती, भालू जंगल कार ।। मजा खूब हमला मिलिस, सब संगवारी संग । खूब घूमेन जुरमिल हम , मन मा रहिस उमंग ।