हाथ धरे पर्स, पर्स म मोबाइल चुपे चाप बोल ले, कर के स्माइल मोर करेजा मोर करेजा उबुक-चुबुक तोला जोहे तोला जोहे करेजा करे बर संगी संगी मोर होइ जाबे ना टाठ-टाठ जिंस पेंट, टाठे हे कुरता तोर झूल-झूल रेंगना के आवत हे सुरता मोर करेजा मोर करेजा उबुक-चुबुक तोला जोहे तोला जोहे करेजा करे बर संगी संगी मोर होइ जाबे ना चढ़े स्कूटी, तै गली घूमे नजर भेर देख, अपन हाथे चूमे मोर करेजा मोर करेजा उबुक-चुबुक तोला जोहे तोला जोहे करेजा करे बर संगी संगी मोर होइ जाबे ना कोहनी ले मेंहदी, अंगठा म छल्ला गजब के सोहत हे, सब करे हल्ला मोर करेजा मोर करेजा उबुक-चुबुक तोला जोहे तोला जोहे करेजा करे बर संगी संगी मोर होइ जाबे ना एके गोड़ म पहिरे, रेशम के डोरी सुटुर-सुटुर रेंगे, करके दिल ल चोरी मोर करेजा मोर करेजा उबुक-चुबुक तोला जोहे तोला जोहे करेजा करे बर संगी संगी मोर होइ जाबे ना
लघु कथा: क्या भूत होते हैं?-रमेश चौहान
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रामाधार के पोते चिंटू ने पहली बार ये सवाल रात के दस बजे पूछा। लाइट चली गई
थी। सुमित्रा रसोई में ढिबरी जला रही थी। बाहर बँसवारी में हवा चल…
4 दिन पहले