जर भुंजा गे खेत मा, बोये हमरे धान । तन लेसागे हे हमर, कइसे जी भगवान ।। तरसत हन हम बूंद बर, धरती गे हे सूख । बरस आय ये तीसरा, पीयासे हे रूख ।। ठोम्हा भर पानी नही, कइसे रखब परान । तन लेसागे हे हमर, कइसे जी भगवान ।। खेत-खार पटपर परे, फूटे हवय दरार । नदिया तरिया नल कुँवा, सुख्खा हावे झार ।। हउला बाल्टी डेचकी, मूंदे आँखी कान । तन लेसागे हे हमर, कइसे जी भगवान ।। बादर होगे दोगला, मनखे जइसे आज । चीं-ची चिरई मन कहय, पापी मन के राज ।। मनखे हावय लालची, बेजाकब्जा तान । तन लेसागे हे हमर, कइसे जी भगवान ।।
छत्तीसगढ़ी काव्य संग्रह आपरेशन एक्के घॉंव भाग-2
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छ्त्तीसगढ़िया के धियान रखैया छत्तीसगढ़िया के धियान रखैया, किसान राज चलैया।
मोर छत्तीसगढ़ में स्वतंत्रता के,नवा सुरुज उगैया।। हमर बर तो एकर पहिली,
रिहिस रा...
2 हफ़्ते पहले