बुधवार, 25 जनवरी 2017

मनखे के धरम

मनमोहन छंद

मनखे के हे, एक धरम । मनखे बर सब, करय करम
मनखे के पहिचान बनय । मनखेपन बर, सबो तनय

दूसर के दुख दरद हरय । ओखर मुड़ मा, सुख ल भरय
सुख के रद्दा, अपन गढ़य । भव सागर ला पार करय

मनखे तन हे, बड़ दुरलभ । मनखे मनखे गोठ धरब
करम सार हे, नषवर जग । मनखे, मनखे ला झन ठग

जेन ह जइसन, करम करय । तइसन ओखर, भाग भरय
सुख के बीजा म सुख फरय । दुख के बीजा ह दुख भरय

मनखे तन ला राम धरय । मनखे मन बर, चरित करय
सब रिश्ता के काम करय । दूसर के सब, पीर हरय

-रमेश चौहान

बुधवार, 18 जनवरी 2017

मया

कुची हथौड़ा के किस्सा । मनखे मन के हे हिस्सा
हथौड़ा ह ताकत जोरय । कुचर-कुचर तारा टोरय  ।

अतकी जड़ कुची ह रहिथे । मया म तारा ले कहिथे
मया मोर अंतस धर ले  ।  अपने कोरा मा भर ले

जब तारा-चाबी मिलथे । मया म तारा हा खुलथे
एक ह जोड़े ला जानय । दूसर टोरे मा मानय

लहर-लहर झाड़ी डोले ।  जब आंधी हा मुँह खोले
रूखवा ठाड़े गिर परथे । अकड़न-जकड़न हा मरथे

शनिवार, 14 जनवरी 2017

राम कथा के सार

राम  कथा मनखे सुनय, धरय नहीं कुछु कान ।
करम राम कस करय नहि, मारत रहिथे शान ।।

राम भरत के सुन कथा, कोने करय बिचार ।
भाई भाई होत हे, धन दौलत बेकार ।।

दान करे हे राम हा, जीते लंका राज ।
बेजा कब्जा के इहाँ, काबर हे सम्राज ।।

गौ माता के उद्धार बर,  जनम धरे हे राम ।
चरिया परिया छेक के,  मनखे करथे नाम ।।

करम जगत मा सार हे, रामायण के काम ।
करम करत रावण बनव, चाहे बन जौ राम ।

नैतिक शिक्षा बिन पढे, सब शिक्षा बेकार ।
थोर बहुत तो मान ले, मनखे बन संसार ।।

-रमेश चौहान

बुधवार, 11 जनवरी 2017

चोरी होगे खोर गली हा

बबा पहर मा खोर गली हा, लागय कोला बारी ।
ददा पहर मा बइला गाड़ी, आवय हमर दुवारी,  ।

नवा जमाना के काम नवा, नवा नवा घर कुरिया ।
नवा-नवा फेषन के आये, जुन्ना होगे फरिया ।।

सब पैठा रेंगान टूटगे, टूटगे हे ओरवाती ।
तभो गली के काबर अब तो, छोटे लागय छाती ।।

घर ओही हे पारा ओही, खोर गली ओही हे ।
गुदा-गुदा दिखय नही अब तो, बाचे बस गोही हे ।

मोर पहर के बात अलग हे, फटफटी न आवय ।
चोरी होगे खोर गली हा, पता न कोनो पावय ।।

शुक्रवार, 6 जनवरी 2017

बिता भर के टुरा कहय तोर बाप के का जात हे

बिता भर के टुरा कहय
तोर बाप के का जात हे

कउवां कुकुर कस ठोकरा भुकय
देख अपन गांव के लइका ला
अपन हद म रहे रहव बाबू
झन टोरव लाज के फइका ला

ही-ही भकभक जादा झन करव
तोरे दाई-माई जात हे

गली मोहाटी बाटल-साटल
खोले काबर बइठे
दारू मंद के आगी म जरे
मरे सांप कस अइठे

सरहा कोतरी के मास
तोला कइसन भात हे

गली-गली म डिलवा ब्रेकर
तोर सेखी न रोक सकय
तोरे दीदी भाई-भोजी
तोला कोसत अपने थकय

घूम-घूम क मेछरावत गोल्लर
नागर म कहां कमात हे ।

बुधवार, 4 जनवरी 2017

मया ल ओ अनवासय

मुचुर-मुचुर जब हासय
ओ मोटीयारी
मया ल तो अनवासय


बिहनिया असन छाये
चुक लाली-लाली
सबके मन ला भाये

चिरई कस ओ चहकय
खोल अपन पांखी
मन बादर मा गमकय

फूल डोहड़ी फूले
झुमर-झुमर डारा
चारो-कोती झूले

अंतस मा मया धरे
आँखी गढियाये
बिन बोले गोठ करे