बुधवार, 31 जनवरी 2018

अइसे कोनो रद्दा खोजव, जुरमिल रेंगी साथ

मोटर गाड़ी के आए ले, घोड़ा दिखय न एक ।
मनखे केवल अपन बाढ़ ला, समझत हावे नेक ।।

जोते-फांदे अब टेक्टर मा, नांगर गे नंदाय ।
बइला-भइसा कोन पोसही, काला गाय ह भाय ।।

खातू-माटी अतका डारे, चिरई मन नंदात ।
खेत-खार मा महुरा डारे, अपने करे अघात ।।

आघू हमला बढ़ना हावे, केवल धरे मशीन ।
मन मा अइसन सोच रहे ले, धरती जाही छीन ।।

जीव एक दूसर के साथी, रचे हवय भगवान ।
मनखे एखर संरक्षक हे, सबले बड़े महान ।।

बड़े मनन घुरवा होथे, कहिथे मनखे जात ।
झेल झपेटा जेने सहिथे, मांगय नही भात ।।

अइसे कोनो रद्दा खोजव, जुरमिल रेंगी साथ ।
जीव पोसवा घर के बाचय, धर के हमरे हाथ ।।

सोमवार, 29 जनवरी 2018

गाय अब केती जाही

टेक्टर चाही खेत बर, झट्टे होही काम ।
नांगर बइला छोड़ दे, कहत हवय विज्ञान ।
कहत हवय विज्ञान, धरम प्रगती के बाधक ।
देवय कोन जवाब, मौन हे धरमी साधक ।
पूछत हवे "रमेश", गाय अब केती जाही ।
बइला ला सब छोड़, कहय जब टेक्टर चाही ।।
-रमेश चौहान

मंगलवार, 23 जनवरी 2018

पांचठन दोहा

 कदर छोड़ परिवार के, अपने मा बउराय ।
अपन पेट अउ देह के, चिंता मा दुबराय ।।

अपन गांव के गोठ अउ, अपन घर के भात ।
जिनगी के पानी हवा, जिनगी के जज्बात ।।

काम नाम ला हे गढ़े, नाम गढ़े ना काम ।
काम बुता ले काम हे, परे रहन दे नाम ।।

दारु बोकरा आज तो, ठाढ़ सरग के धाम ।
खीर पुरी ला छोड़ तैं, ओखर ले का काम ।।

सीख सबो झन बाँटथे, धरय न कोनो कान ।
गोठ आन के छोट हे, अपने भर ला मान ।।

शुक्रवार, 19 जनवरी 2018

छंद चालीसा (छत्तीसगढ़ी छंद के कोठी)

"छंद चालीसा" (छत्तीसगढ़ी छंद के कोठी)
http://www.gurturgoth.com/chhand-chalisa/
ये लिंक म देख सकत हव
ये किताब मा 40 प्रकार के छंद के नियम-धरम ला उदाहरण सहित समझाये के कोशिश करे हंव ।  येखर संगे-संग कई प्रकार के कविता कई ठन विषय मा पढ़े बर आप ला मिलही ।

येला पढ़के अपन प्रतिक्रिया स्वरूप आर्शीवाद खच्चित देहू