मंगलवार, 27 फ़रवरी 2018

धरे उदासी बोलय जमुना घाट

धरे उदासी बोलय जमुना घाट ।
कती हवय अब छलिया तोरे बाट ।।
नाग कालिया कई-कई ठन आज ।
मोरे पानी मा करत हवय राज ।।

कहां लुका गे बासुरीवाला मोर ।
कहां लुका गे तैं मोहन चितचोर ।।
घाट घठौंदा मोर भटत हे जात ।
काबर अब तैं इहां नई तो आत ।।

पइसा (जोगी रा-सा-ररा-रा)

जोगी रा सा रा रा जोगी रा सा रा रा
पइसा पूजा पाठ कहाथे, पइसा हा भगवान ।
पइसा हरियर-हरियर चारा, चरत हवय इंसान ।।जोगी रा सा रा रा
पइसा ले डौकी लइका हे, पइसा ले परिवार ।
पइसे ले दुनिया हे तोरे, पइसा बिन बेकार ।।जोगी रा सा रा रा
मइल हाथ के पइसा होथे, कहि-कहि मरय सियान ।
बात समझ ना पाइस लइका, मारत रहिगे शान ।।जोगी रा सा रा रा
कान-बुता मा घोर पसीना, पइसा आही हाथ ।
करे करम के पूजा-पाठे, मिलय भाग्य के साथ ।।जोगी रा सा रा रा
फोकट मा सरकार बांटथे, अपन करे बर नाम ।
लूट छूट के रीत छोड़ दे, हमला चाही काम ।।जोगी रा सा रा रा

सोमवार, 19 फ़रवरी 2018

ददा (भुजंगप्रयात छंद, अतुकांत)

कहां देवता हे इहां कोन जाने ।
न जाने दिखे ओ ह कोने प्रकारे ।।
इहां देवता हा करे का बुता हे ।
सबो प्रश्न के तो जवाबे ददा हे ।।

ददा मोरे ब्रम्हा देह मोरे बनाये ।
मुँहे डार कौरा ददा बिष्णु मोरे ।।
शिवे होय के दोष ला मोर मांजे ।
ददा हा धरा के त्रिदेवा कहाये ।।

कभू देख पाये न आँसू ल मोरे ।
मने मोर चाहे जऊने ददा दै ।।
खुदे के मने ला ददा हा दबाये ।
जिये हे मरे हे ददा मोर सेती ।।

भरे हाथ कोरा  दिने रात मोला ।
खुदे संग खवाये धरे हाथ कौरा ।।
खुदे पीठ चढ़ाये ददा होय घोड़ा ।
धरे हाथ संगी बने हे ददा हा  ।।

शुक्रवार, 16 फ़रवरी 2018

मया(भुजंगप्रयात छंद, अतुकांत)

                मया
(भुजंगप्रयात छंद, अतुकांत)
कहां देह के थोरको मोल होथे ।
मया के बिना देह हाड़ा निगोड़ा ।।
मया के मया ले मया देह होगे ।
मया साँस मोरे मया प्राण मोरे ।।
करे हे मया हा मया मा मया रे ।
मया के मया मा महूँ हा मया गा ।।
मया ला मया ले करे मैं निहोरा ।
मया धार ड़ोंगा मया ड़ोंगहारे ।।
मया मोर बोली मया मोर हाँसी ।
मया भूख मोरे मया प्यास मोरे ।।
मया भूख के तो मया हा चबेना ।
पियासे मया के मया मोर पानी ।।
मया मोर आँखी मया मोर काने ।
मया हाथ मोरे मया गोड़ मोरे ।।
मया साँस मोरे मया हे करेजा ।
मया जिंदगानी मया मुक्ति रद्दा ।।

बुधवार, 14 फ़रवरी 2018

पइसा के पाछू बइहा झन तो होव

पइसे के पाछू कभू, बइहा झन तो होव ।
चलय हमर परिवार हा, अतका धाने बोव ।
अतका धाने, बोव सबो झन,  भूख मरी मत ।
पइसा पाछू, होके बइहा, हम अति करि मत ।।
दुनिया ले तो, हमला जाना, नगरा जइसे ।
आखिर बेरा, काम न आवय, तोरे पइसे ।।

मंगलवार, 13 फ़रवरी 2018

करना चाही

करना चाही सब कहे, करथे के झन देख ।
नियम-धियम सिद्धांत मा, खोजत हे मिन-मेख ।।
खोजत हे मिन-मेख इहां सब, जी चोराये ।
चलत हवय जब, चंदा-सूरज, सब बंधाये ।।
चिरई-चिरगुन, मानत हावे, हाही-माही ।
सोचत हावे, कहि-कहि मनखे, करना चाही

सोमवार, 12 फ़रवरी 2018

आगी झन बारँव इहां

आगी झन बारँव इहाँ, इहाँ सरग के ठाँव ।
छत्तीसगढ़ नाम हवय, सरग दुवारी छाँव ।।
सरग दुवारी, छाँव निहारत, दुनिया आथे ।
आथे जेने,  इही ठउर मा, बड़ सुख पाथे ।
हमरे माटी, चुपरय छाती, कहि पालागी ।
अपन पराया,  कहि कहि के झन, बारँव आगी ।।

गुरुवार, 8 फ़रवरी 2018

एक दर्जन दोहा


1. दोष निकालब कोखरो, सबले सस्ता काम ।
अपन दोष ला देखना, जग के दुश्कर काम ।।

2. अपन हाथ के मइल तो, नेता मन ला जान ।
नेता मन के खोट ला, अपने तैं हा मान ।।

3. मुगल आंग्ल मन भाग गे, भागे ना वो सोच ।
संस्कृति अउ संस्कार मा, करथें रोज खरोच ।।

4. अपन देश के बात ला, धरे न शिक्षा नीति ।
लोकतंत्र के राज मा, हे अंग्रेजी रीति ।

5. कोनो फोकट मा घला, गाय रखय ना आज ।
गाय ल माता जे कहय, आय न ओला लाज ।।

6. पानी चाही काल बर, तरिया कुँआ बचाव ।
बोर खने के सोच मा, तारा अभे लगाव ।।

7. तरिया नरवा गाँव के, गंदा हावे आज ।
पानी बचाव योजना, मरत हवे गा लाज ।।

8. रद्दा पूछत मैं थकँव, पता बतावय कोन ।
लइका हे ये शहरिया, चुप्पा देखय मोन । ।

9. बाबू मोरे कम पढ़े, कइसे होय बिहाव ।
नोनी मन जादा पढ़े, बहू कहां ले आय ।।

10. सीख सबो झन बाँटथे, धरय न कोनो कान ।
गोठ आन के छोट हे, अपने भर ला मान ।।

11. दारु बोकरा आज तो, ठाढ़ सरग के धाम ।
खीर पुरी ला छोड़ तैं, ओखर ले का काम ।।

12. काम नाम ला हे गढ़े, नाम गढ़े ना काम ।
काम बुता ले काम हे, परे रहन दे नाम ।।

मंगलवार, 6 फ़रवरी 2018

हाथ बर कामे मांगव

मांगय अब सरकार ले, केवल हाथ म काम ।
येमा-वोमा छूट ले, हमर चलय ना काम ।
हमर चलय ना काम, हाथ होवय जब खाली ।
बिना बुता अउ काम, हमर हालत हे माली ।।
सुनलव कहय रमेश, कटोरा खूंटी टांगव ।
छोड़व फोकट छूट, हाथ बर कामे मांगव ।।

नई चाही कुछ फोकट

फोकट मा तो  खाय बर, छोड़व यार मितान ।
हमर आड़ मा देश के, होत हवय नुकसान ।।
होत हवय नुकसान, देश के नेता मन ले ।
फोकट के हर एक, योजना ला तैं गन ले ।।
देथें पइसा चार, हजारों खाथें टोकत ।
हमला चाही काम, नई चाही कुछ फोकट ।।