रविवार, 31 मार्च 2019

जय-जय रघुराई

जय-जय रघुराई, रहव सहाई, तैं सुखदाई जगत कहै, मन भगत लहै ।
गुण तोरे गावय, तेन अघावय, सब सुख पावय दुख न सहै, जब चरण गहै ।।
सब मरम लखावत, धरम बतावत, चरित देखावत पाठ गढे़, ये जगत कढ़े ।
जग रिश्तादारी, करत सुरारी, जगत सम्हारी जगत पढ़े, सब आघु बढ़े ।।

-रमेशकुमार सिंह चौहान

सोमवार, 25 मार्च 2019

अरे पुरवाही, ले जा मोरो संदेश

अरे पुरवाही, ले जा मोरो संदेश
धनी मोरो बइठे, काबर परदेश
अरे पुरवा…ही

मोर मन के मया, बांध अपन डोर
छोड़ देबे ओखरे , अचरा के छोर
सुरुर-सुरुर मया, देवय सुरता के ठेस
अरे पुरवा…ही

जोहत हंवव रद्दा, अपन आँखी गाढ़े
आँखी के पुतरी, ओखर मूरत माढ़े
जा-जा रे पुरवाही, धर के मोरे भेस
अरे पुरवा…ही

मोरे काया इहां, उहां हे परान
अरे पुरवाही, होजा मोरे मितान
देवा दे ओला, आये बर तेश
अरे पुरवा…ही


-रमेश चौहान