बुधवार, 18 सितंबर 2013

मोर मयारू गणेश

मोर मयारू गणेश

दोहा
सबले पहिले होय ना, गणपति पूजा तोर ।
पाँव परत हंँव तोर गा, विनती सुन ले मोर ।।

तोर शरण मा आया जे,, ले श्रद्धा विश्वास ।
पूरा कर देथस सबो, उनखर जम्मो आस ।।

चौपाई
हे गौरा गौरी के लाला । हे प्रभु  तैं हस दीन  दयाला
सबले पहिली तोला सुमरन । तोरे गुण ला गा के  झुमरन

बुद्धि तहीं हा सब ला देथस। दुख पीरा ला हर लेथस
तोरे जस ला वेदे गावय । भारी महिमा तोर बतावय

पहिली चक्कर तैं हा काटे ।  अपन ददा दाई के बांटे
तोर काम ले गदगद भोला । बना दिइस गा गणेश तोला

तोर नाम ले मुहरूत करथन । जीत खुशी ला ओली भरथन
काम-बुता सब सुग्घर होथे । हमरे बाधा मुँड़ धर रोथे

जइसन लम्बा सूड़े तोरे । लम्बा कर दव चिंतन मोरे
जइसन भारी पेटे तोरे । भारी कर दव विचार मोरे

भाथे गौरी दुलार  तोला । ओइसने दव दुलार मोला
गुरूतुर मोदक भाये तोला । मीठ मीठ भाखा दे दव मोला

हे लंबोदर किरपा करदव । गलत सोच ला झट्टे हरदव
मनखे ला मनखे हम मानी । जगत जीव ला एके जानी

हे आखर के मोर देवता । मानव-मानव मोर नेवता
नाश करव प्रभु मोर कुमति के । अन्न-धन्न दौ देव सुमति के

अपने पुरखा अउ माटी के । अपने जंगल अउ घाटी के
धुर्रा माटी माथे पोतँव । अपने संस्कृति मा मैं सोचँव

नारद शारद जस ला गावय । सुन-सुन हमरे मन हरषावय
हे रिद्धी सिद्धी के दाता । अब दुख मेटव भाग्य विधाता

दोहा
भगत शरण जब-जब परय , मेटय सकल कलेश ।
सुख देवय पीरा हरय, मोर मयारू गणेश ।।


मंगलवार, 17 सितंबर 2013

छत्तीसगढ़ी दोहा

छत्तीसगढ़ी दोहा


   हर भाखा के कुछु न कुछु, सस्ता महंगा दाम ।
   अपन दाम अतका रखव, आवय सबके काम ।।

   दुखवा के जर मोह हे , माया थांघा जान ।
   दुनिया माया मोह के, फांदा कस तै मान।।

   ये जिनगी कइसे बनय, ये कहूं बिखर जाय ।
   मन आसा विस्वास तो, बिगड़े काम बनाय ।।




....‘रमेश‘...

रविवार, 8 सितंबर 2013

हे गौरी के लाल


बुद्धि के देवइया अऊ पिरा के हरइया हे गज मुख  वाला ।
सबले पहिली तोला सुमिरव हे षंकर सुत गौरी के लाला ।।

वेद पुरान जम्मो तोरे च गुन ल गाय हे,
सबले पहिली श्रीगणेष कहव बताय हे ।
सभो देवता ले पहिली सुमिरन तोरे कहाये हे,
हे परभू मोरो अंतस ह तोरे च गुन ल गाये हे ।

शुरू करत हव तोर नाम ले, ये कारज गृह जंजाला,
हे गजानन दया करहू झन होवय कुछु गड़बड़ झाला । हे गौरी के लाला.........

जइसे लंबा लंबा सूड़ तोरे,
लंबा कर दव सोच ल मोरे ।
जइसन भारी पेट तोरे,
गहरा बना दव विचार ल मोरे ।

अपन माटी अऊ अपन पुरखा के सेवा गावंव ले सुर लय ताल ।
हे एकदन्त एक्केच किरपा करहू बुद्धि ले झन रहव मै कंगाल ।। हे गौरी के लाल.....

जइसे भाते उमा महेश के मया ह तोला,
ओइसने अपन मया दे दव मोला ।
मिठ मिठ लाडू जइसे भाते तोला,
ओइसने गुतुर गुतुर भाखा दे दव मोला ।

कुमति के नाश कर सुमति ले भर दौव मोरो भाल ।
हे आखर के देवता मोरो गीत ल लौव सम्हाल ।। हे गौरी के लाल............


दाई ल धरती ददा ल अकास कहिके कहाय गणेश,
तोर ये बुद्धि ल जम्मो देवता ले बड़का कहे हे महेश ।
तोरे च शरण आये नारद अऊ सब देवता संग सुरेश ,
हे दयावंत तुहरे शरण आये हे ये मुरख ‘रमेश‘ ।।

रिद्धी सिद्धी के दाता प्रभू सिंदुर सोहे तोर भाल ।
मोरो दुख मेटव हे गौरी के लाल, हे गौरी के लाल ।।

-रमेश चैहान

गुरुवार, 5 सितंबर 2013

खुशी मनाओ भई आज खुशी मनाओं

भादो के महीना घटा छाये अंधियारी,
बड़ डरावना हे रात कारी कारी ।

कंस के कारागार बड़ रहिन पहेरेदार,
चारो कोती चमुन्दा हे खुल्ला नईये एकोद्वार ।

देवकी वासुदेव पुकारे हे दीनानाथ,
अब दुख सहावत नइये करलव सनाथ ।

एक एक करके छैय लइका मारे कंस,
सातवइया घला होगे कइसे अपभ्रंस ।

आठवईंया के हे बारी कइसे करव तइयारी,
ऐखरे बर होय हे आकाशवाणी हे खरारी ।

मन खिलखिवत हे फेर थोकिन डर्रावत हे,
कंस के काल हे के पहिली कस एखरो हाल हे ।

ओही समय चमके बिजली घटाटोप,
निचट अंधियारी के होगे ऊंहा लोप ।

बिजली अतका के जम्मो के आंखी कान मुंदागे,
दमकत बदन चमकत मुकुट चार हाथ वाले आगे ।

देवकी वासुदेव के हाथ गोड़ के बेड़ी फेकागे,
जम्मो पहरेदारमन ल बड़ जोर के निदं आगे ।

देखत हे देवकी वासुदेव त देखत रहिगे,
कतका सुघ्घर हे ओखर रूप मनोहर का कहिबे ।

चिटक भर म होइस परमपिता के ऊंहला भान,
नाना भांति ले करे लगिन ऊंखर यशोगान ।

तुहीमन सृष्टि के करइवा अव जम्मो जीव के देखइया अव,
धरती के भार हरइया अऊ जीवन नइया के खेवइया अव ।

मायापति माया देखाके होगे अंतरध्यान,
बालक रूप म प्रगटे आज तो भगवान ।

प्रगटे आज तो भगवान मंगल गाओं,
खुशी मनाओ भई आज खुशी मनाओं ।

..............‘‘रमेश‘‘............