जात-पात भाषा-बोली, अउ मजहबी गोठ राजनीति के चारा ले, पोठ होगे देश मा । टोटा-टोटा बांधे पट्टा, जस कुकुर पोसवा देश भर बगरे हे, आनी-बानी बेश मा । कोनो अगड़ी-पिछड़ी, कोनो हिन्दू-मुस्लिम कोनो-कोनो दलित हे, ये बंदर बाट मा । सब छावत हवय, बस अपने कुरिया देश भले बोहावय, धारे-धार बाट मा ।।
कहिनी:पानी हे अमोल -डोरेलाल कैवर्त
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“‘ बिन पानी नि हे जिनगानी* ” ए कहना सोलाआना सिरतोन आय । पानी के बिना जिनगी
जिए के कल्पना घलो नि करे जा सके ? हमन सबो जानत हांवन…
4 दिन पहले