जात-पात भाषा-बोली, अउ मजहबी गोठ राजनीति के चारा ले, पोठ होगे देश मा । टोटा-टोटा बांधे पट्टा, जस कुकुर पोसवा देश भर बगरे हे, आनी-बानी बेश मा । कोनो अगड़ी-पिछड़ी, कोनो हिन्दू-मुस्लिम कोनो-कोनो दलित हे, ये बंदर बाट मा । सब छावत हवय, बस अपने कुरिया देश भले बोहावय, धारे-धार बाट मा ।।
पुरु–उर्वशी संवाद:विरह में रचा जीवन-आदर्श उज्जवल उपाध्याय
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वाक्यों, विचार, भावुकता पर नेत्रों पर और सरलता पर, देवत्व तिरस्कृत कर उस
दिन उर्वशी मुग्ध थी नरता पर, अप्सरा स्वर्ग की, नारी बन पृथ्वी के दुख सुख
सहने ...
3 हफ़्ते पहले