आज स्कूल के टूर मा, घूमेन ठउर पांच । कौशिल्या मां ठउर ले, घूचापाली सांच । राजिम चम्पारण ठउर, खल्लारी तो गेन। संग संगवारी चारझन, खूब मज़ा तो लें । कौशिल्या माता राम के, भाचा हमरे राम । चंदखुरी सुघ्घर गांव से, जे कौशिल्या धाम ।। राजीव लोचन झरझर, महानदी के धार । पैरी सोढुर के मेल ले, हरय पाप ला झार ।। जगन्नाथ के रुप हे, ये लोचन राजीव । दरस परस जब करें हन, होंगे भक्ति संजीव । चंपारण वल्लभ प्रगट, गढ़े भक्ति के धाम । श्याम श्याम मन श्याम भज, जो एकै आधार । खल्लारी माता धाम मा, सीढ़ी बने हजार । जय माता जयकार ले, मन हा भरे हमारे ।। घूचापाली मां हवय, मां चण्डी दरबार । जिहां करें हे आरती, भालू जंगल कार ।। मजा खूब हमला मिलिस, सब संगवारी संग । खूब घूमेन जुरमिल हम , मन मा रहिस उमंग ।
एक राजर्षि की मूर्त कल्पना है शाहजहांपुर की पब्लिक लाइब्रेरी-प्रो रवीन्द्र
प्रताप सिंह
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तकनीकी क्रांति के इस दौर में जब सब कुछ डिजिटल माध्यमों पर सिमटता जा रहा है,
तब भी किताबों का आकर्षण और महत्व कम नहीं हुआ है। किताबें केवल शब्दों…
2 हफ़्ते पहले