तोर-मोर माया घोर हे, न ओर हे ना छोर । तोर ह तो तोरे हवय, अउ मोरे हा मोर ।। कोनो ला माने अपन, हो जाही ओ तोर। घर के खपरा ला घला, कहिथस तैं हा मोर ।। मोर कहे मा मोर हे, तोर कहे मा तोर। मया मोर मा हे घुरे, तोर कहे ला छोर।। ना जान न पहिचान हे, तब तक तैं अनजान। माने तैं ओला अपन, होगे तोर परान ।। माने मा पथरा घला, हवय देवता तोर । लकड़ी के खम्भा घला, हवय देवता मोर ।। मन के माने मान ले, माने मा सब तोर । तोर-मोर ला छोड़ के, कहि ना सब ला मोर ।।
कहिनी:पानी हे अमोल -डोरेलाल कैवर्त
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“‘ बिन पानी नि हे जिनगानी* ” ए कहना सोलाआना सिरतोन आय । पानी के बिना जिनगी
जिए के कल्पना घलो नि करे जा सके ? हमन सबो जानत हांवन…
5 हफ़्ते पहले