खेले बिजली खेल (कुण्डलियां) चमनी-कंड़िल हे नहीं, नइ हे माटीतेल । अंधियार तो घर परे, खेले बिजली खेल ।। खेले बिजली खेल, कहत मोला छू लेवव । खेलत छू-छूवाल, दॉव मोरे दे देदव ।। धन-धन हवय ‘रमेश’, टार्च मोबाइल ठिमनी ।। घर मा लाइन गोल, नई हे कंडिल-चिमनी ।।
लघु कथा: क्या भूत होते हैं?-रमेश चौहान
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रामाधार के पोते चिंटू ने पहली बार ये सवाल रात के दस बजे पूछा। लाइट चली गई
थी। सुमित्रा रसोई में ढिबरी जला रही थी। बाहर बँसवारी में हवा चल…
2 दिन पहले