बुधवार, 25 जून 2014

ये गोरी मोरे

ये गोरी मोरे, मुखड़ा तोरे, चंदा बानी, दमकत हे ।
जस फुलवा गुलाब, तन के रूआब, चारो कोती, गमकत हे ।।
जब रेंगे बनके, तै हर मनके, गोड़ म पैरी, छनकत हे ।
सुन कोयल बोली, ये हमलोली, मोरे मनवा, बहकत हे ।।
-रमेशकुमार सिंह चौहान

सोमवार, 23 जून 2014

दोहा


1. आमा रस कस प्रेम हे, गोही कस हे बैर ।
गोही तै हर फेक दे, होही मनखे के खैर ।।
2. लालच अइसन हे बला, जेन परे पछताय ।
फसके मछरी गरी मा, अपन जाने गवाय ।।
3. अपन करम गति भोग बे, भोगे हे भगवान ।
बिंदा के ओ श्राप ले, बनगे सालिक राम ।।
4. करम बड़े के भाग हा, जोरव ऐखर  ताग ।
नगदी पइसा कस करम, कोठी जोरे  भाग ।।
5. लाश जरत तै देख के, का सोचे इंसान ।
ऐखर बारी हे आज गा, काली अपन ल जान ।।
-रमेश

मंगलवार, 17 जून 2014

तांका


1.  
झांक तो सही
अपन अंतस ला
फेर देखबे
दुनिया के गलती
कतका उथली हे ।
2.  
बारी बखरी
खेत खार परिया
घाट घठौन्धा
कुॅंआ अऊ तरिया
सरग कस गांव हे ।
3. 
 हो जाथे मया
बिना छांटे निमेरे
काबर फेर
खोजत हस जोही
हाथ मा दिल हेरे ।