शनिवार, 5 दिसंबर 2015

धनी मया हा तोर

तन मन मा तो छाय हे, धनी मया हा तोर ।
मोर हाल ला देख के, मचे गांव मा शोर ।।

महर महर करथे मया, चारो कोती छाय  ।
मोरे मन के हाल हा, छूपय नही छुपाय।।
तोर मया बिन रात हे, होत नई हे भोर । तन मन मा ...

आंखी खोजे रात दिन, चारो डहर निहार ।
मन फंसे आठो पहर, तोरे करत बिचार ।।
निंद भूख लागय नही, आथे सपना घोर । तन मन मा ...

ये दुनिया के बंधना, लागे हे जंजीर ।
तोर बिना बेकार हे, जिनगी मोरे हीर ।।
तोर मया के छांव बर, रेंगव कोरे कोर । तन मन मा ...