सोमवार, 1 अगस्त 2016

आज हरेली हाबे

छन्न पकइया छन्न पकइया, आज हरेली हाबे ।
गउ माता ला लोंदी दे के, बइला धोये जाबे ।

छन्न पकइया छन्न पकइया, दतिया नांगर धोले ।
झउहा भर नदिया के कुधरी, अपने अॅगना बो ले ।।

छन्न पकइया छन्न पकइया, कुधरी मा रख नागर ।
चीला रोटी भोग लगा के, खा दू कौरा आगर ।।

छन्न पकइया छन्न पकइया, ये पारा वो पारा ।
राउत भइया हरियर हरियर, खोचे लिमवा डारा ।

छन्न पकइया छन्न पकइया, घर के ओ मोहाटी ।
लोहारे जब खीला ठोके, लागे ओखर साटी ।।

छन्न पकइया छन्न पकइया, केवट भइया आगे ।
मुड़ मा डारे मछरी जाली, लइका मन डररागे ।।

छन्न पकइया छन्न पकइया, नरियर फेके जाबो ।
खेल खेल मा जीते नरियर, गुड़ मा भेला खाबो ।।

छन्न पकइया छन्न पकइया, गेड़ी चर-चर बाजे ।
चढ़य मोटियारी गेड़ी जब, आवय ओला लाजे ।।

छन्न पकइया छन्न पकइया, सबले पहिली आथे ।
परब हरेली हमरे गढ़ के, सब झन ला बड़ भाथे ।।