सोमवार, 31 अक्तूबर 2016

हिन्दू के बैरी हिन्दू

हिन्दू ला हिन्दू होय म, आवत हवय लाज ।
हिन्दू के बैरी हिन्दू, काबर हवय आज ।।
सबो धरम दुनिया मा हे, कोनो करे न बैर ।
हिन्द ह हिन्दू के नो हय, कोन मनाय खैर ।।

सबो धरम  हा इहां बढ़य, हमला न विद्वेश ।
हमर मान ला रउन्द मत, आय हमरो देश ।।
हिन्दू कहब पाप लागय, अइसन हे समाज ।
दुनिया भर घूमत रहिके, नई बाचय लाज ।।

जन्नत ला डहाय

सिंहिका छंद
ये बैरी अपने घर मा. आगी तो लगाय ।
मनखे होके मनखे ला. अब्बड़ के सताय ।।
अपने ला धरमी कहिथे. दूसर ला न भाय ।।
जन्नत के ओ फेर परे, जन्नत ला डहाय ।।

रविवार, 30 अक्तूबर 2016

मन के अंधियारी मेट ले

मन के अंधियारी मेट  ले
(सरसी छंद)
मन के अंधियारी मेट ले, अंतस दीया बार ।
मनखे मनखे एके होथे, ऊंच-नीच ला टार ।।

घर अँगना हे चिक्कन चांदन, चिक्कन-चिक्कन खोर ।
मइल करेजा के तैं धो ले, बांध मया के डोर ।
मन के दीया बाती धर के, तेल मया के डार।।
मन के अंधियारी मेट ले, अंतस दीया बार ।

जनम भूमि के दाना पानी, हवय तोर ये देह ।
अपन देष अउ धरम-करम मा, करले थोकिन नेह ।।
अपने पुरखा अउ माटी के, मन मा रख संस्कार ।
मन के अंधियारी मेट ले, अंतस दीया बार ।

नवा जमाना हे भौतिक युग, यंत्र तंत्र ला मान ।
येमा का परहेज हवय गा, रखव समय के ध्यान ।
भौतिक बाहिर दिखवा होथे, अंतस के संस्कार ।
मन के अंधियारी मेट ले, अंतस दीया बार ।

सोमवार, 24 अक्तूबर 2016

दाना-दाना अलहोर

अपन सबो संस्कार ला, मान अंध विश्वास ।
संस्कृति ला कुरीति कहे, मालिक बनके दास ।

पढ़े लिखे के चोचला, मान सके ना रीति ।
कहय ददा अढ़हा हवय, अउ संस्कार कुरीति ।।

रीति रीति कुरीति हवय, का बाचे संस्कृति ।
साफ-साफ अंतर धरव , छोड़-छाड़ अपकृति ।।

दाना-दाना अलहोर के, कचरा मन ला फेक ।
दाना कचरा संग मा, जात हवय का देख ।।

धरे आड़ संस्कार के, जेन करे हे खेल ।
दोषी ओही हा हवय, संस्कृति काबर फेल ।।

दोषी दोषी ला दण्ड दे, संस्कृति ला मत मार ।
काली के गलती हवय, आज ल भला उबार ।।

रविवार, 23 अक्तूबर 2016

ये जीनगी के काहीं धरे कहां हे

अभी मन हा
भरे कहां हे
ये जीनगी के
काहीं धरे कहां हे

चाउर दार निमेर के
पानी कांजी भरे हे
घर के मोहाटी मा
दीया बाती धरे हे
अभी चूल्हा मा
आगी बरे कहां हे

करिया करिया
बादर हा छाये हे
रूख-राई हा
डारा-पाना ल डोलाये हे
पानी के बूँद हा अभी
धरती मा परे कहां हे

काल-बेल के
घंटी घनघनावत हे
हड़िया के अंधना
सनसनावत हे
जोहत हे भीतरहिन
अभी पैना भरे कहां हे

गुरुवार, 20 अक्तूबर 2016

गाय गरूवा अब पोषय कोन

जुन्ना नागर बुढ़वा बइला
पटपर भुईंया जोतय कोन

खेत खार के पक्की सड़क म
टेक्टर दउड़य खदबद-खदबद
बारह नाशी नागर के जोते
काबर कोंटा बाचे रदबद

बटकी के बासी पानी के घइला
संगी के ददरिया होगे मोन

पैरा-भूसा  दाना-पानी
छेना खरसी गोबर कचरा
घुरवा के दिन हा बहुरे हे
कोन परे अब येखर पचरा

फोकट म घला होगे महंगा
गाय गरूवा अब पोषय कोन

मंगलवार, 18 अक्तूबर 2016

नारी नर ले भारी

छन्न पकइया छन्न पकइया, नारी नर ले भारी ।
जेन काम मा देखव संगी, लगे हवय गा नारी ।।

छन्न पकइया छन्न पकइया, नारी नो हय अबला ।
देखाये हे अपने ताकत, नारी मन हा सब ला ।

छन्न पकइया छन्न पकइया, सेना मा हे नारी ।
बैरी मन के छाती फाड़े, मारत हे किलकारी ।।

छन्न पकइया छन्न पकइया, हवे कलेक्टर नारी ।
मास्टर डाँक्टर इंजिनियर अउ, हवे पुलिस पटवारी ।।

छन्न पकइया छन्न पकइया, नारी के का कहना ।
हावे नेता अउ अधिकारी, अम्मा दीदी बहना ।

छन्न पकइया छन्न पकइया, नारी बने व्यपारी ।
हर काउन्टर मा नोनी मन, गोठ करे हे भारी ।।

छन्न पकइया छन्न पकइया, लगे अचंभा भारी ।
घर के अपने बुता बिसारे, पढ़े-लिखे कुछ नारी ।।

छन्न पकइया छन्न पकइया, वाह रे मोटियारी ।
बना नई सके चाय कप भर, करे हे होशियारी ।

छन्न पकइया छन्न पकइया, अब के आन भरोसा ।
दाई पालनहारी रहिस ग, परसे कई परोसा ।।

छन्न पकइया छन्न पकइया, मनखे चिरई होगे ।
धरती के कुरिया ला छोड़े, गगन म जाके सोगे ।।

सोमवार, 17 अक्तूबर 2016

जात.पात ला छोड़व कहिथे

जात.पात ला छोड़व कहिथे, गिनती जे करथे ।
बाँट-बाँट मनखे के बोटी, झोली जे भरथे ।।

गढ़े सुवारथ के परिभाषा, जात बने कइसे ।
निरमल काया के पानी मा, रंग घुरे जइसे ।।

अगड़ी पिछड़ी दलित रंग के, मनखे रंग धरे ।
रंग खून के एक होय कहि, फोकट दंभ भरे ।

जात कहां रोटी-बेटी बर, कहिथे जे मनखे ।
आरक्षण बर जाति बता के, रेंगे हे तनके ।।

खाप पंचायत कोरी.कोरी, बनथे रोज नवा ।
एक बिमारी अइसन बाचे, बाढ़े रोज सवा ।।

काम ये खेती किसानी

   काम ये खेती किसानी, आय पूजा आरती ।
    तोर सेवा त्याग ले, होय खुश मां भारती ।।
    टोर जांगर तै कमा ले, पेट भर दे अब तही ।
    तै भुईयां के हवस गा, देव धामी मन सही ।। 1।।

    तोर ले हे गांव सुघ्घर, खेत पावन धाम हे ।
    तै हवस गा अन्नदाता, जेन सब के प्राण हे ।।
    मत कभू हो शहरिया तै, कोन कर ही काम ला ।
    गोहरावत हे भुईंयां, छोड़ झन ये धाम ला ।।2।।
  

शुक्रवार, 14 अक्तूबर 2016

चमचा मन के ढेर हे

चमचा मन के ढेर हे
बात कहे मा फेर हे

गोड़ पखारत देखेंव जेला
ओही बने लठैत हे
पिरपिट्टी ओखर घर के
हमर मन बर करैत हे

कुकुर कस पूछी डोलावय
कइसे कहिदंव शेर हे

हाँक परे मा सकला जथे
मंदारी के डमरू सुन
बेंदरा भलुवा बन के कइसन
नाचथे ओखरे धुन

चारा के रहत ले चरिस
अब बोकरा कोन मेर हे

अपने डहर मा रेंग तैं

अपने डहर मा रेंग तैं, काटा खुटी ला टार के ।
कोशिश करे के काम हे, मन के अलाली मार के ।।
जाही कहां मंजिल ह गा, तोरे डगर ला छोड़ के ।
तैं रेंग भर अपने डगर, काया म मन ला जोड़ के ।।

गुरुवार, 13 अक्तूबर 2016

‘अपने अचरा छोर‘ mp3

मोर ये गीत ला  स्वर दे हे-प्रेम पटेल


‘अपने अचरा छोर‘

‘गोदवाय हंव गोदना‘mp3

‘मोर गजानन स्वामी बिराजे हे‘ mp3

‘आजा मोरे अँगना‘ mp3

मोर गीत ला आवाज दे हें- प्रेम पटेल अउ स्वाती सराफ
‘आजा मोरे अँगना‘
‘आजा मोरे अँगना‘

‘गढ़ बिराजे हो मइया‘mp3

मोर गीत ला आवाज दे हें- प्रेम पटेल अउ स्वाती सराफ
‘गढ़ बिराजे हो मइया‘

‘भादो के महिना‘mp3

मोर गीत ला आवाज दे हें- प्रेम पटेल 
‘भादो के महिना‘
https://drive.google.com/open?id=0B_vVk5gISWv3ZmxmX3hiMXRZaWc

‘हे महामाई दया कर‘ mp3

मोर गीत ला आवाज दे हें- प्रेम पटेल 
‘हे महामाई दया कर‘
https://drive.google.com/open?id=0B_vVk5gISWv3eWh6RnZhOUNRTXc

‘दाई नवगढ़िन हवय‘ mp3

मोर गीत ला आवाज दे हें- प्रेम पटेल 
‘दाई नवगढ़िन हवय‘
https://drive.google.com/open?id=0B_vVk5gISWv3WlVUQmMzakdSUG8

‘जगमग-जगमग जोत जलत हे‘ mp3

मोर गीत ला आवाज दे हें- प्रेम पटेल
‘जगमग-जगमग जोत जलत हे‘
https://drive.google.com/open?id=0B_vVk5gISWv3QjhIVmxKSzc3RXM‘जगमग-जगमग जोत जलत हे‘

‘सोलह सिंगार तोरे माता‘ mp3

मोर गीत ला आवाज दे हें- प्रेम पटेल 
‘सोलह सिंगार तोरे माता‘
https://drive.google.com/open?id=0B_vVk5gISWv3V0tMMmNrX21memM

‘जय हो मइया शारदे mp3

मोर गीत ला आवाज दे हें- प्रेम पटेल 
‘जय हो मइया शारदे‘

‘अपने अचरा छोर मा‘ mp3

मोर गीत ला आवाज दे हें- प्रेम पटेल अउ स्वाती सराफ
‘अपने अचरा छोर मा‘
https://drive.google.com/open?id=0B_vVk5gISWv3aEVhWGYtb0l3ZTg

‘टाँठ-टाँठ जिन्स पेंट पहिरे‘ mp3

मोर गीत ला आवाज दे हें- प्रेम पटेल अउ स्वाती सराफ
‘टाँठ-टाँठ जिन्स पेंट पहिरे‘
https://drive.google.com/open?id=0B_vVk5gISWv3Ui1DdEtqM1MzQnM

‘छत्तीसगढ़ ला कहिथे भैया‘ mp3

मोर गीत ला आवाज दे हें- प्रेम पटेल अउ स्वाती सराफ
‘छत्तीसगढ़ ला कहिथे भैया‘
https://drive.google.com/open?id=0B_vVk5gISWv3bDUwNnVma0NKMWM

‘कुँआ पार मा‘ mp3

मोर गीत ला आवाज दे हें- प्रेम पटेल अउ स्वाती सराफ
‘कुँआ पार मा‘
https://drive.google.com/open?id=0B_vVk5gISWv3dERqclQ1VC0zdWM

‘मैं पगला तैं पगली होगे‘ mp3

मोर गीत ला आवाज दे हें- प्रेम पटेल अउ स्वाती सराफ

https://drive.google.com/open?id=0B_vVk5gISWv3MFV2WFFSZGc4MU0

बुधवार, 12 अक्तूबर 2016

मउत

मउत ह
करिया बादर बन
चौबीस घंटा छाये हे

कभू सावन के बादर बन
खेत खार ला हरियावय
फल-फूल अन्न-धन्न  उपजाके
जीव-जीव ला सिरजावय

कभू-कभू
गाज बनके
आगी ल बरसाये हे

ओही बादर ला देख
मनखे झूमय नाचय
आगी कस दहकत घाम ले
मनखे-मनखे बाचय

गुस्सा मा
जब बादर फाटय
पर्वत घला बोहाये हे

एक बूँद बरसे न जब बादर
चारो कोती हाहाकार मचे हे
सृष्टि के हर अनमोल रचना
ये चक्कर ले कहां बचे हे

आवत-जावत
करिया बादर
सब ला नाच नचाये हे

मंगलवार, 11 अक्तूबर 2016

मन के परेवना

मन के परेवना
उड़ी-उड़ी के
दुनिया भर घूमत हे

ठोमहा भर मया होतीस
सुकुन के पेड़ जेन बोतीस
लहर लहर खुषी के लहरा
तन मन ला मोर भिगोतीस

आँखी मा सपना
देखी-देखी के
अपने तकिया चूमत हे

अरझे सूत ला खोलत-खोलत
अपने अपन मा बोलत-बोलत
जीनगी के फांदा मा फसे
चुरमुरावत हे डोलत-डोलत

अपने हाथ ला
चाब-चाब के
अपने आँखी ला घूरत हे

गीत कोयली लीम करेला

गीत कोयली
लीम करेला
कउवा बोली आमा

उत्ती के सुरूज, बुड़ती उवय
बुड़ती के सुरूज उत्ती बुड़य
मनखे नवा सोच ला पाये
शक्कर मा मिरचा ला गुड़य

होगे जुन्ना हा,
जहर महुरा
आये नवा जमाना


डिलवा डिलवा डबरा होगे
डबरा डबरा बिल्डिंग पोगे
कका बबा के संगे छोड़े
दाई ददा हा अलग होगे ।

माचिस काड़ी
छर्री-दर्री
समाही अब कामा

झूठ लबारी उज्जर दिखय
अंधरा मन इतिहास लिखय
अपन भाषा हा पर के लागय
पर के भाषा मनखे मन सीखय

खड़े पेड़ ला
टंगिया मा काटय
बोये नवा दाना

गुरुवार, 6 अक्तूबर 2016

अंधियारी मेट दे

(गीतिका छंद)
ठान ले मन मा अपन तैं, जीतबे हर हाल मा ।
जोश भर के नाम लिख दे, काल के तैं गाल मा ।
नून बासी मा घुरे कस, दुख खुशी ला फेट दे ।
एक दीया बार के तै, अंधियारी मेट दे ।