SURTA ]- छत्तीसगढ़ी भाषा अउ छत्तीसगढ़ के धरोहर ल समर्पित

रमेशकुमार सिंह चौहान के छत्तीसगढ़ी काव्यांजली:- सुरता rkdevendra.blogspot.com
ये जीनगी के काहीं धरे कहां हे

ये जीनगी के काहीं धरे कहां हे

अभी मन हा भरे कहां हे ये जीनगी के काहीं धरे कहां हे चाउर दार निमेर के पानी कांजी भरे हे घर के मोहाटी मा दीया बाती धरे हे अभी चूल्ह...
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गाय गरूवा अब पोषय कोन

गाय गरूवा अब पोषय कोन

जुन्ना नागर बुढ़वा बइला पटपर भुईंया जोतय कोन खेत खार के पक्की सड़क म टेक्टर दउड़य खदबद-खदबद बारह नाशी नागर के जोते काबर कोंटा बाचे रदबद ...
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ताते-तात

शिव-शिव शिव अस (डमरू घनाक्षरी)

डमरू घनाक्षरी (32 वर्ण लघु) सुनत-गुनत चुप, सहत-रहत गुप दुख मन न छुवत, दुखित रहय तन । बम-बम हर-हर, शिव चरण गहत, शिव-शिव शिव अस, जग दुख भर मन ...

अउ का-का हे इहाँ-