मंगलवार, 16 मई 2017

आँखी म निंदिया आवत नई हे

तोर बिना रे जोही
आँखी म निंदिया आवत नई हे

ऊबुक-चुबुक मनुवा करे
सुरता के दहरा मा
आँखी-आँखी रतिहा पहागे
तोर मया के पहरा मा

चम्मा-चमेली सेज-सुपेती
मोला एको भावत नई हे
तोर बिना रे जोही
आँखी म निंदिया आवत नई हे

मोर ओठ के दमकत रंग ह
लाली ले कारी होगे
आँखी के छलकत आंसू
काजर ले भारी होगे

अइसे पीरा देस रे छलिया
छाती के पीरा जावत नई हे
तोर बिना रे जोही
आँखी म निंदिया आवत नई हे

आनी-बानी सपना के बादर
चारो कोती छाये हे
तोरे मोहनी काया के फोटू
घेरी-बेरी बनाये हे

छाती म आगी दहकत हे
बैरी पिरोहिल आवत नई हे
तोर बिना रे जोही
आँखी म निंदिया आवत नई हे