सोमवार, 22 मई 2017

देश-भक्ति

हमर धरम तो बस एक हे । देश-भक्ति हा बड़ नेक हे
जनम-भूमि जन्नत ले बड़े । जेखर बर बलिदानी खड़े

मरना ले जीना हे बड़े । जीये बर जीवन हे पड़े
छोड़ गोठ तैं अधिकार के । अपन करम कर तैं झार के

अपने हिस्सा के काम ला । अपने हिस्सा के दाम ला
करना हे अपने हाथ ले । भरना हे अपने हाथ ले

बइमानी भ्रष्टाचार के। झूठ-मूठ के व्यवहार के
जात-पात के सब ढाल ला । तोड़व ये अरझे जाल ला

देश बड़े हे के प्रांत हो । सोचव संगी थोकिन शांत हो
देश गढ़े बर सब हाथ दौ । आघू रेंगे बर सब साथ दौ

मनखे-मनखे एके मान के । सबला तैं अपने जान के
मया-प्रेम मा तैं बांध ले । ओखर पीरा अपने खांध ले

 देश मोर हे ये मान ले । जीवन येखर बर ठान ले
अपने माने मा तो तोर हे । नही त तोरे मन मा चोर हे