मंगलवार, 13 जून 2017

पियासे ठाड़े जोहय, रद्दा एको बूंद के

करिया-करिया घटा, बड़ इतरावत
बड़ मेछरावत, करत हवे ठठ्ठा ।
लुहुर-तुहुर कर, ठगनी कस ठगत
बइठारत हवे, हमरे तो भठ्ठा ।।
नदिया-तरिया कुँआ, घर के बोर बोरिंग
पियासे ठाड़े जोहय, रद्दा एको बूंद के ।
कोन डहर बरसे, कोन डहर सोर हे
बैरी हमरे गांव ला, छोड़े हवे कूंद के ।।