सुख दुख के तही संगवारी ।
तोर मया बर मै बलिहारी ।।
मोर संग तै देवत रहिबे ।
मोर भूल चूक सहत रहिबे ।
पाठ मितानी के धरे रहब ।
काम एक दूसर करत रहब ।।
तोर सबो पीरा मोरे हे ।
मोर सबो पीरा तोरे हे ।।
बिन तोरे ये जीनगी दुभर ।
बिन संगी हम जीबो काबर ।।
तोर मया जीनगी ल गढ़थे ।
मोला देखत तोला पढ़थे ।।
-रमेश चौहान
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