पहिली मुरकेटव, इखर टोटा (द्वितीय झूलना दंडक छंद) एक खड़े बाहिर, एक अड़े भीतर, बैरी दूनों हे, देष के गा । बाहिर ले जादा, भीतर के बैरी, बैरी ले बैरी, देष के गा ।। बाहिर ला छोड़व, भीतर ला देखव, पहिली मुरकेटव, इखर टोटा । बाहिर के का हे, भीतर ला देखत, पटाटोर जाही, धरत लोटा ।। -रमेशकुमार सिंह चौहान
हास्य नज़्म-प्रो.रवीन्द्र प्रताप सिंंह
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उस्तरा ले के बुलाता है हज्जाम,चले आओलेना है इन जुल्फों से इंतकाम चले आओ ।
रंग ओ रोगन से छुपाई है जो सफेदी इनकीदेखो उसका क्या होगा अंजाम, चले आओ ।
कैंचियां ...
1 हफ़्ते पहले