सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कतका झन देखे हें-

हे भारत महतारी

हे भारत महतारी  परणाम हवय गाड़ा-गाड़ा,   हे भारत महतारी  । तोरे महिमा कइसे गावव,  दुनिया मा ये भारी ।। परणाम हवय गाड़ा-गाड़ा,   हे भारत महतारी  । तोरे महिमा कइसे गावव,  दुनिया मा ये भारी ।। हे भारत महतारी  हे भारत महतारी  हे भारत महतारी  लहर-लहर नदियां लहरावय, सरर-सरर पुरवाही। रुख -राई  गमगम ले गमके, फर धर हाही-माही।। खेतखार अउ अरिया-परिया,  हरियर-हरियर छाये। जंगल-झाड़ी सागर परवत, सबके मन ला भाये ।। लइका मन के पेट भरे बर,  धरे परोसा थारी। परणाम हवय गाड़ा-गाड़ा,   हे भारत महतारी  । हे भारत महतारी  हे भारत महतारी  हे भारत महतारी  गुरतुर-गुरतुर भाखा बोली, गुरतुर हॅंसी ठिठोली। लुकलुक ले चंदा चंदैनी, सूरत सुग्घर भोली ।। तोरे लइका जयकार करत, सुर म सुर मिलाये। महतारी के रक्षा खातिर, मुड़ मां कफ़न बंधाये ।। हम तो बारा घला बजाबो,  नो हय झूठ लबारी । परणाम हवय गाड़ा-गाड़ा,   हे भारत महतारी  । हे भारत महतारी  हे भारत महतारी  हे भारत महतारी   -रमेश चौहान...

मोर दूसर ब्लॉग