हे भारत महतारी परणाम हवय गाड़ा-गाड़ा, हे भारत महतारी । तोरे महिमा कइसे गावव, दुनिया मा ये भारी ।। परणाम हवय गाड़ा-गाड़ा, हे भारत महतारी । तोरे महिमा कइसे गावव, दुनिया मा ये भारी ।। हे भारत महतारी हे भारत महतारी हे भारत महतारी लहर-लहर नदियां लहरावय, सरर-सरर पुरवाही। रुख -राई गमगम ले गमके, फर धर हाही-माही।। खेतखार अउ अरिया-परिया, हरियर-हरियर छाये। जंगल-झाड़ी सागर परवत, सबके मन ला भाये ।। लइका मन के पेट भरे बर, धरे परोसा थारी। परणाम हवय गाड़ा-गाड़ा, हे भारत महतारी । हे भारत महतारी हे भारत महतारी हे भारत महतारी गुरतुर-गुरतुर भाखा बोली, गुरतुर हॅंसी ठिठोली। लुकलुक ले चंदा चंदैनी, सूरत सुग्घर भोली ।। तोरे लइका जयकार करत, सुर म सुर मिलाये। महतारी के रक्षा खातिर, मुड़ मां कफ़न बंधाये ।। हम तो बारा घला बजाबो, नो हय झूठ लबारी । परणाम हवय गाड़ा-गाड़ा, हे भारत महतारी । हे भारत महतारी हे भारत महतारी हे भारत महतारी -रमेश चौहान...
कहिनी:पानी हे अमोल -डोरेलाल कैवर्त
-
“‘ बिन पानी नि हे जिनगानी* ” ए कहना सोलाआना सिरतोन आय । पानी के बिना जिनगी
जिए के कल्पना घलो नि करे जा सके ? हमन सबो जानत हांवन…
6 दिन पहले