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कतका झन देखे हें-

हिन्दी छत्तीसगढ़ी भाखा

हिन्दी छत्तीसगढ़ी भाखा, अंतस गोमुख के गंगा ।
छलछल-छलछल पावन धारा, तन मन ला राखे चंगा ।।
फेशन बैरी छाती छेदय, मिलावटी बिख ला घोरे ।
चुटुर-पुटुर अंग्रेजी आखर, पावन धारा मा बोरे ।।

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