गोड के साटी नंदा गे, हाथ के चुरी हरागे, मुड़ी के चुंदी कटागे, अब टूरी मन के । माथा के टिकली हर, नाक मा उतर गे हे, कुतर दे हे चेंदरा, मुसवा फेसन के ।। पहिने हे टिप टाप, छोटे-छोटे छांट-छांट, मोबाइल धरे हाथ, गोठ लमावत हे । तन आधा हे उघरा, मुॅह मा तोपे चेंदरा, सरर सरर कर, गाड़ी चलावत हे ।।
व्यंग्य: दिल का इलाज, रामबाण उपाय-डॉ.विनोद नायक
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1 दिन पहले