बुधवार, 5 मार्च 2014

होली के उमंग

होली के उमंग (‍त्रिभंगी छंद)

हे होली उमंग, धरे सब रंग, आनी बानी, भाथे ना ।
ले के पिचकारी, सबो दुवारी, लइका ताने, हाथे ना ।।
मल दे गुलाल, हवे रे गाल, कोरा कोरा, ओखर गा ।
वो करे तंग, मया के रंग, तन मन तोरे, चोखर गा ।।

मारी डारे


तै संगी मोला, तरसा चोला, मारी डारे, काबर ना ।
गे कबके विदेश, भेजे संदेश, एको पाती, चाकर ना ।।
जे दिन ले आएं, तै ना भाएं, एको चिटीक, मोला रे ।
तै पइसा होगे, किस्मत सोगे, गे उमर बीत, भोला रे ।।

भुजंगप्रयात छन्द

         भुजंगप्रयात छन्द

1.    कहां मोर हंसा सुवा हा उड़े गा ।
    कहे कोन संगी हवा मा जरे गा ।
    भये ठाठ तो ठाट आखीर काया ।
    तभो जीव हा फेर ले फसे माया ।

2.    मरे हे कहां गा कभू तोर आत्मा ।
    कहे श्री कभू होय ना जीव खात्मा।।
    नवा रे नवा वो धरे फेर चोला ।
    करे देह के मोह ला त्याग भोला ।।

3.    चना दार ला डार रांघे करेला ।
    तिजा तै रहे गोइ जीये मरेला ।।
    धरे लूगरा तोर दाई ह देवे ।
    ददा संग मांगे तभे च लेवे ।।

4.    नवा रे जमाना नवा हे लईका ।
    नवा हे मकाने नवा हे फईका ।।
    धरे खाय पाऊच रे देख लैला ।
    पिये दारू माते बने देख छैला ।।

कंचन काया हवय तोर

कंचन काया हवय  तोर ।
लजागे चंदा सुन सोर ।
कतका सुघ्घर तोर गोठ ।
सुन कोयल करे मन छोट ।

चुन्दी कारी तोर देख ।
घटा बादर होगे पेख ।         पेख -पेखन - खिलौना
पारे पाटी बने मांग ।
पाछू फूल गजरा टांग ।

मांगमोती आघू ओर ।
सुरूज जस चमके खोर ।
माथा टिकली गोल गोल ।
समा गे जम्मा भूगोल ।

नाक नथनी झुमका कान ।
आंखी तोर तीर कमान ।
ओट तोरे फूल गुलाब ।
दे गोइ अनमोल खिताब ।

सुराही गर्दन श्रृंगार ।
पहिरे तै सोनहा हार ।
लाली लुगरा डारे खांध ।
कनिहा म करधनिया बांध ।

रून झुन करे साटी गोड़ ।
सुन देखय सब मुह ल मोड़ ।
तोरे सोलहो सिंगार ।
मुरदा देही जीव डार ।

मेनका उर्वशी सबो फेल ।
हवय रूप मा जादू खेल ।
फर्सुत म विधाता गढ़े ।
देखे बर देवता ह खड़े ।

मोला तै कनेखी देख ।
मया कर हू मै अनलेख ।
देख तोर एक मुस्कान ।
दे दू हूं गोइ अपन जान ।

मंगलवार, 4 मार्च 2014

जीये बर जरूरी हवय (कुण्डलि)

जीये बर जरूरी हवय, हमन ला तीन बात ।
मुड़ मा होवय छांव गा, मिलय पेट भर भात ।।
मिलय पेट भर भात, बदन मा होवय कपड़ा ।
पति पत्नि संग होय, रूढ़े मनाय के लफड़ा ।।
संगी मन के प्यार, सबो दुख ल लेथे पिये ।
ददा दाई के दुलार, देख हमरे बर जीये ।।

करा दव बिहाव आसो (कुण्डलि)

आसो करवा दे बबा, मोरो तै ग बिहाव ।
कानी खोरी कइसनो, खोजे बर तो जाव ।।
खोजे बर तो जाव, डहत हे मोर जुवानी ।
कइसे बबा सुनाव, अपन मै तोला कहानी ।।
हासय संगी मोर, तुहू मन मोला हासो ।
फेर कइसनो होय, करा दव बिहाव आसो ।।

सोमवार, 3 मार्च 2014

हे महामाई दया कर

1.    हे महामाई दया कर, हम नवावन माथ ला ।
    तोर दर मा हम पड़े हन, छोड़ बे झन साथ ला ।।
    तोर जश सब भक्त गावन,  ढोल मादर थाम मा ।
    जीभ बाणा ले रखे हन  सांट लेवन हाथ मा ।।1।।


    हे जवांरा जोत दाई, तोर रूप विश्वास मा ।
   जाप श्रद्धा ले करे हन, नाम तोरे सास मा ।।
    भाग मा जतका भरे हे, मेट दे संताप ला ।
    शक्ति अतका दे न दाई, छोड़ दी हम पाप ला ।।2।।



शनिवार, 1 मार्च 2014

जुझारू बाजा फेर बजांव

बस्तर के मोरे भुंईया, हवय छत्तीसगढ़ के शान ।
जंगल झाड़ी डोंगरी जिहां, हवे छत्तीसगढ़ के आन ।।

बस्तरिहा मन भोला भाला, जइसे गा भोला भगवान ।
ऊघरा रही करे गुजारा, संकट मा हे इखर परान ।।

जब ले इहां नकसली आगे, जागे हे नकसली जमात ।
छानही म जस भुंजय होरा, मचाय हवंय बड़ उत्पात ।।

छोटे  बड़े सबो मनखे के, बोकरा कस करे ग हलाल ।
सरकार असहाय कस लागे, हाथ मिंज के करे मलाल ।।

बैरी अब तो सिर चढ़ नाचे, मचे हवय गा हाहाकार ।
नेता जवान सबो मरत हे, घात लगा जब करे प्रहार ।।

लुका-लुका के इन लड़त हवे, अपन आप बहादुर बताय ।
फोकट फोकट के मनखे ला, काबर एमन मार गिराय ।।

कब तक हम सब देखत रहिबो, टुकुर टुकुर जस ध्यान लगाय ।
पापी के जर नाश करे बर, कइसे हम सब करी उपाय ।।

छाती मा आगी दहकत हे, धनुष बाण अब लौव उठाव ।
शांति बर अब फेर लड़ना हे, जुझारू बाजा ल फेर बजाव ।।