मंगलवार, 29 जुलाई 2014

भोजली गीत

रिमझिम रिमझिम
सावन के फुहारे ।
चंदन छिटा देवंव दाई
जम्मो अंग तुहारे ।।

तरिया भरे पानी
धनहा बाढ़े धाने ।
जल्दी जल्दी सिरजव दाई
राखव हमरे माने ।।

नान्हे नान्हे लइका
करत हन तोर सेवा ।
तोरे संग मा दाई
आय हे भोले देवा ।।

फूल चढ़े पान चढ़े
चढ़े नरियर भेला ।
गोहरावत हन दाई
मेटव हमर झमेला ।।
-रमेशकुमार सिंह चैहान

शनिवार, 26 जुलाई 2014

करेजा मा महुवा पागे मोर (युगल गीत)



मुच मुच मुचई गोरी तोर
करेजा मा महुवा पागे मोर ।
    सुन सुन के बोली धनी तोर
    तन मन मा नषा छागे मोर ।
चंदा देख देख लुकावत हे,
छोटे बड़े मुॅह बनावत हे,
एकसस्सू दमकत, एकसस्सू दमकत,
गोरी चेहरा तोर ।। करेजा मा महुवा पागे मोर
    बनवारी कस रिझावत हे
    मन ले मन ला चोरावत हे,
    घातेच मोहत, घातेच मोहत,
    सावरिया सूरत तोर । तन मन मा नषा छागे मोर
मारत हे हिलोर जस लहरा
सागर कस कइसन गहरा
सिरतुन मा, सिरतुन मा,  
अंतस मया गोरी तोर ।। करेजा मा महुवा पागे मोर
    छाय हवय कस बदरा
    आंखी समाय जस कजरा
    मोरे मन मा, मोरे मन मा
    जादू मया तोर । तन मन मा नषा छागे मोर
मुच मुच मुचई गोरी तोर
करेजा मा महुवा पागे मोर ।
    सुन सुन के बोली धनी तोर
    तन मन मा नषा छागे मोर ।
-रमेशकुमार सिंह चैहान

रविवार, 13 जुलाई 2014

मोर छत्तीसगढ़ के कोरा

सरग ले बड़ सुंदर भुईंया, मोर छत्तीसगढ़ के कोरा ।
दुनिया भर ऐला कहिथे, भैइया धान के कटोरा ।।
    मैं कहिथंव ये मोर महतारी ऐ
    बड़ मयारू बड़ दुलौरिन
    मोर बिपत के संगवारी ऐ
    सहूंहे दाई कस पालय पोसय
    जेखर मैं तो सरवन कस छोरा
संझा बिहनिया माथा नवांव ऐही देवी देवता मोरे
दानी हे बर दानी हे,दाई के अचरा के छोरे ।।
    मोर छत्तीसगढ़ी भाखा बोली
    मन के बोली हिरदय के भाखा
    हर बात म हसी ठिठोली
    बड़ गुरतुर बड़ मिठास
    घुरे जइसे सक्कर के बोरा
कोइला अऊ हीरा ला, दाई ढाके हे अपन अचरा
बनकठ्ठी दवई अड़बड़, ऐखर गोदी कांदी कचरा
    अन्नपूर्णा के मूरत ये हा
    धन धान्य बरसावय
    श्रमवीर के माता जे हा
    लइकामन ल सिरजावय
    फिरे ओ तो कछोरा
सरग ले बड़ सुंदर भुईंया, मोर छत्तीसगढ़ के कोरा ।
दुनिया भर ऐला कहिथे, भैइया धान के कटोरा ।।

-रमेशकुमार सिंह चौहान

मंगलवार, 8 जुलाई 2014

बाबू के ददा हा , दरूहा होगे ना (गीत)

गीत

बोली ओखर तो, करूहा होगे ओ
बाबू के ददा हा , दरूहा होगे ना ।

मोरे ओ मयारू, रहिस अड़बड़ ......
पी अई के तो मारे, बइसुरहा होगे ना ।

रूसे कस डारा, डोलत रहिथे.......
बाका ओ जवान, धक धकहा होगे ना ।

फोकट के गारी, अऊ फोकट के मार.........
जीयवं कइसे गोई, धनी झगरहा होगे ना ।

पिलवा पिलवा लइका, मरवं कइसे........
जीनगी हा मोरे, अब अधमरहा होगे ना ।


-रमेशकुमार सिंह चौहान

मंगलवार, 1 जुलाई 2014

बैरी बादर

ये बैरी बादर, भुलाय काबर, सब जोहत हें, रद्दा तोरे ।
कतेक ल सताबे, कब तै आबे, पथरावत हे, आंखी मोरे ।।
धरती के छाती, सुलगे आगी, बैरी सूरज, दहकत हे ।
आवत हे सावन, लगे डरावन, पानी बर सब, तरसत हे ।।
-रमेशकुमार सिंह चौहान

नाचा पेखन

चल जाबो देखन, नाचा पेखन, कतका सुघ्घर, होवत हे ।
जम्मो संगी मन, अब्बड़ बन ठन, हमन ल तो, जोहत हे ।।
नाचत हे बढि़या, ओ नवगढि़या, परी हा मान, टोरत हे ।
जोकर के करतुत, हसाथे बहुत, सब्बो झन ला, मोहत हे ।।
-रमेशकुमार सिंह चौहान