सोमवार, 4 अप्रैल 2016

लगत जेठ कस चइत हा

लगत जेठ कस चइत हा, कइसन घाम जनाय ।
अइसे कइसे होत हे, कोने आज बताय ।।

बड़े बिहनिया देख तो, हे चर चर ले घाम ।
गरम गरम लागे हवा, कइसे करबो काम ।
हवय काम कोठार मा, बैरी घाम सताय ।।
लगत जेठ कस चइत हा...

तरिया नरवा अउ कुॅवा, बइठे हे बिन काम ।
बंद होत हे बोर हा, छोड़े अपने नाम ।।
चिरई चिरगुन चीं चीं करत, पानी बर चिल्लाय ।।
लगत जेठ कस चइत हा....

मनखे मनखे सोच लव, काबर पीरा झार ।
बेजा कब्जा मा फसे, तरिया नरवा पार ।
काट काट के पेड़ ला, अपने खेत बढ़ाय ।
लगत जेठ कस चइत हा...

लालच मा मनखे फसे, रोके नदिया धार ।
अपने घर के गंदगी, तरिया नरवा डार ।।
छेदे धरती के पेट ला, मनखे नई अघाय ।
लगत जेठ कस चइत हा...